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Reena Srivastava

Abstract

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Reena Srivastava

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शहीद

शहीद

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एक फौजी जो जो हमारे देश के बॉडर मे रहकर हमारी रझा तो करता है, लेकिन क्या उस फौजी के घरवाले अपने ही देश मे सुरक्षित है।

ये कहानी है रामदीन की, जो एक छोटे से गॉव से रहता है, बहुत दिन से वो अपने घर नही आया था क्योंकि बॉडर मे जंग छिडी हुई थी, और दुश्मनो से हमारे देश की रझा कर रहा था।

बात उन दिनो की है जब रामदीन बॉडर मे जंग लड़ रहा था। और इधर उसके परिवार वाले भूख की जंग लड रहे थे।

रामदीन अपने घर मे अकेला था कमाने वाला, उसके घर की स्थिति बहुत अच्छी नही थी, उसके घर मे बुढ़े मॉ-बाप पत्नि और चार बच्चे थे, इतने दिनो से जंग चलने के कारण उसके घर मे महिने की तनख्वाह नही पहुंची थी।

उसके घर मे आनाज का एक दाना तक नही था कि वो बच्चों को भी कुछ बनाकर खिलाएं।

फिर रामदीन की पत्नी साहूकार के पास जाती है,कुछ अनाज लेने के लिए, मगर साहूकार उसे आनाज देने से मना कर देता है, क्योंकि उसके पास उधारी बहुत हो गए थे। वो बोला पहले का पैसा भर उसके बाद आनाज दूंगा वो विनती करते रह जाती है कि मेरे पति आंएगे तो सारे पैसे वापस कर दूंगी, मगर साहूकार उसकी एक बात नही सुनता, और फटकार देता है, कहता है तेरा पति वापस आएगा भी की नही इसका कोई पता है, और जो बॉडर मे जंग लड़ने जाते है ना, वो शाहीद हो, ही आते है।

साहूकार की गलती ये थी कि अगर तु उसे आनाज नही देना था तो नहीं देता, लेकिन ऐसी बाते करके उसके परिवार का धैर्य तो नहीं तोड़ता, उसका फर्ज था कि वो उनके परिवार को रामदीन के लौटने का भरोसा देता, मगर नही, ये हमारे देश की सबसे बड़ी कमजोरी है,

फिर रामदीन की पत्नि को समझ मे नही आ रहा था कि कहॉ से अनाज लाऐ और कैसे अपने परिवार वालो का पेट भरे, घरवाले सभी भूख से तड़प रहे थे।

रामदीन के बच्चे एक ही सवाल करते की कब बाबा घर आंऐगे और कब हमे भर पेट खाना मिलेगा।

फिर रामदीन की पत्नि कहती है, चिन्ता क्यों करते हो बहुत जल्द तुम्हारे बाबा घर आंऐगे, अभी वो भी तो जंग मे फंसे है ना, अगर वो बॉडर मे जंग नही लड़ेगे तो हमारे देश की रझा कैसे होगी।

इस तरह के बाते करके अपने बच्चो को फुसलाकर मना लेती, लेकिन अन्दर ही अन्दर वो दु:खी भी रहती की पता नही वो जंग से वापस आऐगे भी की नही,ये चिन्ता उसे हमेशा सताऐ रहती 

कहीं ना कहीं वो ये बात जानती थी की, अगर उसके पति वापस नही आंऐगे तो उनलोग का क्या हाल होगा।

फिर जैसे-तैसे दिन गुजरते रहे, बच्चे भूख से तड़पते रहे, ना पति की कोई खबर आ रही थी, और नाही घर का हाल मे कोई सुधार था।

फिर एक दिन खबर आती है कि रामदीन बॉडर मे शहीद हो गया, ये खबर सुनकर उसके घर वालो के पैरो के नीचे से जमीन हट गई हो, सभी के रो-रोकर बुरा हाल हो रहा था।

मगर रामदीन के पत्नि के ऑखो मे ऑसु के एक बूंद नही बहे, फिर एक दिन सारे परिवार को पानी मे जहर घोलकर पीला देती है, और खुद भी पी जाती है, इसतरह सारे परिवार खत्म हो जाते है, ऐसा कदम उसने इसलिए उठाया की उसे लगा जब उसका पति जिन्दा था तो कोई उसे एक वक्त का अनाज नसीब नही हुआ तो पति के मर जाने के बाद, कौन उनलोग की देखभाल करेगा, वो जीते जी भी मर ही रहे थे,तो क्यों नहीं एक ही बार मे खत्म हो जाए, इसतरह वो सबको जहर देकर मर जाती है।

रामदीन देश की सुरझा के लिए शहीद हो गया और परिवार भूख से बचने के लिए शाहीद हो गए।

ऐसा है हमारा देश, ऐसे शहीदों को जितनी सलामी दी जाए कम है।


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