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Nandita Srivastava

Abstract

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Nandita Srivastava

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पति

पति

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आज हमारे जीवन का किरदार हमारा पति हाँ पति ही तो है ,जिसको हमने चाहा बहुत चाहा सब कुछ छोडकर विवाह किया वह भी छोटी आयु में,जिस के लिये बहुत कुछ छोडा पर एक बहुत ही खूबसूरत समय बिताया यह अलग बात है कि अब हम अलग हो रहे है,बडा ही अजरज होता है कि इतना लंबा सफर तय करने के बाद हम पुरूष मानसिकता नही बदल पाये बहुत कोशिश करी की वह बदले या हम बदले पर शायद दोनो ही नही बदल पाये मैं यह नही कहूगीं की दोनो ने कोशिश नही करी नहीं दोनो ने ही कोशिश करी पर एक गुलाम रहना ही नही चाहता दूसरा गुलाम बनाने पर तुला,पर जो भी हुआ ठीक ही हुआ एक खूबसूरती से अलग होना ही बहुत बडी बात है,बस वही सब चल रहा है कई बार महिलाये पुरूष हमारे पास आते की हम अपने पति के.साथ नही रहना चाहते या हम अपनी बीबी के साथ नही रहना चाहते तो हमारी सीधी बात यही की घुटन में रहने से बढ़िया है चलो अलग हो जाये इसका मतलब यह नही कि तलाक को बढ़ावा दे रहे है,इसका मतलब यह है कि ना साथ रह सको तो अलग हो जाओ.चलिये आप सब का दिन मंगलय हो


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