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नयी रीत चला के तुम

नयी रीत चला के तुम

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खुशहाल परिवार मम्मी पापा, बड़ी बेटी आरती, बेटा अर्पित

आरती के कॉलेज का पहला दिन (और जो सदियों से होता आया है)

पापा - बेटा कॉलेज में एडमिशन दिलाया है लेकिन ये याद रखना सिर्फ पढ़ने के लिए, किसी लड़के से दोस्ती की जरूरत नहीं, पढ़ाई के नाम पर दोस्तों के साथ मटरग्‍स्ती नहीं कुछ भी हो जाए कभी किसी लड़के से लिफ्ट मत लेना, सड़क पे अवारा लड़के मिलेंगे सर झुका के निकल जाना वहाँ से उन्हे देखने की या कुछ कहने की जरूरत नहीं और हाँ कपड़े तौर तरीके वाले पहनना, कॉलेज में सिर्फ अपनी पढ़ाई से मतलब रखना कॉलेज से सीधा घर और घर से सीधा कॉलेज, अगर मेरे कान में कोई उलटी सीधी बात पड़ी तो फिर तुम्हारी पढ़ाई को ले के सोचना पड़ेगा मुझे इज देट क्लियर!!!

आरती - जी पापा

चार साल बाद

अर्पित के कॉलेज का पहला दिन

पापा - ओह माइ सन कॉलेज जा रहा है, एंजॉय योर लाइफ वेल, यही तो दिन हैं मौज मस्ती के

अर्पित - यस डैड , आइ लव यू

मम्मी - रुक बेटा, कॉलेज में एडमिशन पढ़ाई के लिए लिया है तो सबसे पहले सारा ध्यान पढ़ाई पे, दूसरी बात बाइक तेरी सुविधा के लिए दी गयी है हीरोगिरी मत दिखाना, बाइक पे कोई लड़की नहीं दिखनी चाहिए कभी अगर गलती से भी कभी पान सिगरेट के दुकान पर दिख गया तो खैर नहीं और सबसे जरूरी बात कोई लड़की अगर वेस्टर्न कपड़ों में है तो उसे देख होश हवास खोने की जरूरत नहीं जैसे तेरी मम्मी और बहन हैं वैसे ही वो लड़कियां भी है और ये क्या कटी फटी जीन्स पहन रखी है जा के ढंग की जीन्स पहन और अगर गलती से भी तुझे अवारागर्दी करते देख लिया तो उस दिन से कॉलेज बंद तेरा!!!!

पापा - क्या बच्चे के पीछे हाथ धो के पड़ गयी हो!

मम्मी - पीछे नहीं पड़ी हूँ जिस तरह बेटी को थोड़े संस्कार सिखाने और पाबंदी लगाना जरूरी है उसी तरह बेटो को भी सही समय पर सही गलत समझाना बहुत जरूरी है तभी शायद बेटियों को भी थोड़ी निश्चिंतता और सुकून भरी आजादी मिल पाएगी!

बेटा बेटी दोनों बराबर हैं तो उन्हें संस्कार भी बराबरी में दीजिए!


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