रंजना उपाध्याय

Abstract Children Stories


4.2  

रंजना उपाध्याय

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नकचढ़ी ननद

नकचढ़ी ननद

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कविता एक साधारण परिवार से थी।गाँव की पढ़ी मतलब हिंदी मीडियम से थी।कविता की शादी जिस परिवार में हुई।सब तो ठीक था।लेकिन सासु माँ को अपनी बेटी सुमन की पढ़ाई पर बहुत नाज था।

कविता की शादी अरेंज मैरिज हुई थी।तो घर के किसी भी सदस्य के बारे में कुछ भी नही पता था।लेकिन कविता का पति अमन ने अपनी छोटी बहन के बारे में बता दिया था।

कविता एक बात सुनो कविता तुरन्त बोली जी बताइये।क्या बात है।अमन ने बोला- देखो मेरी बहन सुमन थोड़ी नक चढ़ी है उसके मुह कम ही लगना।वो कब और किस बात पर गुस्सा हो जाएगी तुम्हें पता भी नही चलेगा।

कविता ने बोला ठीक है।मुझे तो डर लग रहा है।अमन ने तुरन्त बोला तुम खुद कभी कुछ मत कहना उसे जो बोलना है बोले उससे तुम्हें कोई लेना देना नही है।

कविता को सुमन से डर लगने लगा।बेचारी कविता डर बस बोल ही नही पाती थी।एक दिन पढ़ाई से सम्बंधित कोई बात छिड़ गई।तो सासु माँ ने बोला अरे उससे कोई पार पायेगा।अरे मेरी सुमन साइंस से पढ़ी है।MSC की है।

सुमन और अहंकार से सर ऊंचा कर के बोलने लगी।तब तक अमन आ गया।अरे सुमन पता है हम फेल हो गए और तुम पास हो गयी थी।लेकिन हिंदी में सबसे ज्यादा नम्बर हैं तो कविता के हाईस्कूल में भी इंटर में भी इतना सुनते ही सुमन को मानो क्या हो गया।

सुमन तोड़ फोड़ करने लगी अरे आज बीबी का नम्बर दिख रहा है हमने क्लॉस में टॉप किया था।वो भी साइंस से कविता भाभी गाँव की पढ़ी वो हिंदी मीडियम अरे मेरे एक भी सवाल का जवाब दे दें तो जानू हद है एक इंग्लिश मीडियम और एक हिंदी मीडियम से पढ़ी छात्रा को बराबर कैसे को मान सकता है।

सबका अपना अपना क्षेत्र होता है।छोटी होने के नाते माँ पिता की दुलारी थी।अगर कविता और अमन शॉपिंग के लिए जाते तो पहले सुमन को तैयार करते थे फिर जाते थे।सबसे पहले सुमन की शॉपिंग होती थी।फिर घर के बाकी सदस्यों की शॉपिंग होती थी।

सबको डर बना रहता था।कि कहीं सुमन को बुरा न लगे।लेकिन जब शादी ढूढ़नी शुरू हुई।तो पिता ने समझाया कि देखो ये तुम्हारा मायका है।यहां पर हर कोई तुम्हारा सहता है।लेकिन क्या ससुराल में इस तरह कोई सह कर रह पाएगा।

अपनी भाभी कविता को देखो तुम इतना बोलती हो फिर भी अमन से कह कर तुम्हें हर जगह ले जाती है।अमन नहीं ले जाना चाहता क्योंकि उसे भी अपनी पत्नी के साथ अकेले में समय बिताने का हक है और वो चाहता भी है।

क्या तुम भी इस तरह बर्दाश्त कर पाओगी।बेटी अब अपने अंदर सुधार लाओ।अब वह वक्त आ गया है कि तुम अपनी माँ ऑयर भाभी से कुछ सीखों।

हालांकि यह बात भी सुमन को बुरी लगी।लेकिन अपने कमरे जाकर काफी देर तक लेटी रही ।कमरे से बाहर नहीं निकली तो माँ परेशान की कविता ने कुछ कह दिया होगा।

सासु माँ कविता को जाकर खूब खरी खोटी सुनाई।तुम्हे मेरी सुमन नहीं पसन्द है तो उससे बोलती क्यों हो।अब तो वो कुछ ही दिन की मेहमान है।पता नहीं कैसे लोग मिलेंगे।कैसे रहेगी अरे बहू कुछ दिन तो ढंग से रह लेने दो।उसकी खुशी तुमसे देखी नही जाती।

कविता अपनी सफ़ाई में बस इतना ही बोले जा रही थी।क्या हुआ।सुमन दीदी को हमने तो कुछ भी नहीं किया।कहाँ हैं!तब तक सुमन को अपनी गलतियों का अहसास तो हो ही गया था।अपनी माँ को भाभी कविता को डाँटने से रोका और बोला अरे माँ तुम भी न हर बार भाभी को ही दोषी मानती हो।वो मेरी तरह मुझे पापा ने अहसास करवा दिया।

अब आज से ही मैं अपने अंदर बदलाव लाऊंगी।भाभी मुझे माफ कर देना।मुझसे बहुत सारी गलतियां हुई हैं।दोनो एक दूसरे के गले लग कर रोने लगी।और धीरे धीरे सुमन के अंदर काफी बदलाव आया।

सुमन की शादी हुई।सुमन अपने ससुराल गयी।लेकिन एक दूसरे की बेस्ट फ्रेंड बनी रहीं।अच्छा हुआ जो पिता जी ने समझाया ये बात तो माँ जी को चाहिए थी।लेकिन वो तो सर पर बिठा रखी थी।देर से ही भला जो हुआ अच्छा हुआ।

लेकिन सुमन सुखी नहीं थी।सुमन की चार ननद और चारों का बहुत ही खुरापाती दिमाग था।सुमन अपनी भाभी कविता से बताती थी।माँ पिता से नही बताती की माँ पिता जी बहुत दुखी होंगे।

अब अपने किये का पछतावा हो रहा था।हमने अपने भाभी को बहुत सताया है।आज उसी के पाप भोग रही हूँ।सुमन का पति भी अपनी बहनों के कहने में रहता था।मानो उस घर के हर सुख दुख की मालकिन चारों बहनें ही थी।

सुमन मतलब कुछ भी नहीं।एक दिन सुमन के भाई अमन को कविता ने बताया।इस तरह से सुमन दी परेशान रहती हैं।एक बार आप जीजा जी से बात तो करिए।या दोनों लोगों को अपने यहाँ अकेले खाने पर बुलाया जाय।तब बात किया जाय।

अमन गुस्सा हो गया।ये कैसे हो सकता है।उसकी चार बहनों को भी बुलाना पड़ेगा।दिल से न सही दिखावे के लिए ही बुलाना पड़ेगा।चलो ठीक बुला लेते हैं।सबको भेज देंगे।जीजा जी को और सुमन को रोक लेंगे।फिर बात किया जायेग।

अमन ने फोन किया सुमन से पहले बात किया फिर सुमन की सास से और बोल दिया कि आज खाने पर बुलाना चाह रही थी कविता तो आपकी आज्ञा हो तो सपरिवार आज आइये माँ जी ,माँ जी ने तुरंत हाँ कर दिया।सब शाम को तैयार होकर पहुचे कविता खूब आव भगत की सभी लोव खूब खुश हुए।

अब जाने की बारी आई तो सासु माँ ने बोला अरे सुमन चलोगी भी की यही रहने का इरादा है।सुमन कुछ बोली नहीं हल्की सी मुस्कान लिए खड़ी रही।तब तक अमन ने बोला कि आप लोग आज जाइये सुमन और जीजा को कल सुबह हम छोड़ देंगे।माँ ने तो अच्छा बनने के चक्कर मे बोल दिया ठीक है।लेकिन बहने मानने को तैयार नहीं हुई।

लेकिन बहुत कहने सुनने के बाद सब तैयार हुई।सुमन और सुमन के पति को मौका मिला बात करने का और अमन और कविता ने भी बहुत सारी बातें किये।थोड़ी बहुत समझ मे आया।सुमन ने बोला यहाँ आप बोल रहे हैं।दीदी के सामने बोलने की हिम्मत नहीं होती है।

दुर्गेश को कुछ पता ही नहीं रहता था।दुर्गेश के सामने माँ बेटी बहुत ही प्यार से अमन के साथ पेश आती थी।इससे कभी आभास ही नहीं कर पाया।अब इतनी बड़ी बात ससुराल में गके पता चला।थोड़ा क्रोध आया।लेकिन सब ख़त्म करके सुमन का साथ देने को राजी हुआ।

सुमन का पति ( दुर्गेश ) ने बोला कि अब हमने बोल दिया न कि मेरी जिम्मेदारी है।फिर तुम क्यों बोल रही हो।तुमने ये सब हमे बताया क्यों नहीं।सुमन ने बोला कैसे और कब बताऊँ।हर वक़्त पहरा लगा रहता था।दरवाजे पर आँखे गड़ी रहती थी।

कान लगाए सब छिपी रहती थी।आपने खुद कभी जानने की कोशिश की मैं दुखी क्यों हूँ।या मेरा मूड ऑफ़ क्यों है।एक रात रुकने का फायदा तो हुआ।अब सुमन की भी प्रूफ इकट्ठा करने लगी।अपना फोन रिकॉर्डिंग मूड पर रख देती दिन भर की बात रिकॉर्ड रहती ।जब दुर्गेश आता तो पहले सुनता था।

उसके बाद अपने पिता से बोल दिया कि पिता जी अब यहाँ रहने लायक नहीं है।ये लोग अपने घर मे आग लगा ही चुकी हैं अब मेरे घर मे भी आग लगा रही हैं।

इन लोगों का मायका तो नहीं छोडवाना है लेकिन सुमन को लेकर मैं अब इस घर मे नहीं रहूंगा।शाम को ही सुमन को लेकर उसके मायके छोड़ दिया।फिर किराये का मकान लिया।फिर सुमन को लेकर आया।

अब सुमन भी सुखी रहने लगी।इसी तरह पति सपोर्ट करने वाला सबको मिले।जो जैसा करता है उसे वैसे ही वापस मिलता है।तो दोस्तों आज की छोटी सी लघुकथा कैसी लगी।गलतियों के लिये माफ़ी चाहूँगी।आप सब की रंजना उपाध्याय।।©®



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