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Sunanda Aswal

Abstract Classics Inspirational

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Sunanda Aswal

Abstract Classics Inspirational

नचिकेता जीवन के बाद रहस्य

नचिकेता जीवन के बाद रहस्य

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कौन है ये नचिकेता और आखिर यम उनसे क्यों हारे ...?

एक पौराणिक गाथा , नचिकेता मृत्यु और मृत्यु के पश्चात।

नचिकेता--- एक कहानी में मृत्यु के उपरांत जीवन में ..क्या पाया जब यम से वह मिला। जीवन ज्ञान या धन दौलत ..?

ऐसा कौन सा ज्ञान है जो ,मृत उपरांत मिलता है और मनुष्य जीवन स्वछंद रहते हुए भी दान पुण्य करने में भी मित व्ययी हो जाता है..।

इसी विचार की यह अद्भुत कहानी है :

जब ..

ऋषि वाजश्रवा के पुत्र नचिकेता को मात्र पांच वर्ष की आयु में जीवन ज्ञान प्राप्त हुआ..।

एक बार ऋषि ने विश्व- जीत यज्ञ का आयोजन किया। उसमें बहुत से देव ऋषि,संत और साधू शामिल हुए... यह यज्ञ देवताओं को प्रसन्न करने के लिए रखा गया था।

यज्ञ के पश्चात ऋषि को बहुत सी सम्पति दान देनी थी परंतु ,उन्होंने सम्पति के स्थान पर बीमार और रूग्ण गायों को दान के लिए ब्राह्मणों और ऋषियों को भेंट में दिया।

नचिकेता यह सब देख रहे थे ,उनके मन में बहुत संताप हुआ, इस बात को पिता से पूछा," पिता आपने यह अच्छा नहीं किया। ऐसी लाचार और बीमार गायों को दान नहीं देना चाहिए था। यदि किसी को दान में दी गई चीज उपयोगी ना हो तो दान का मान नहीं होता। अब आप बताएं यदि , मुझे दान देना हो तो किसको दान देते ?"

पिता बोले ,"बेटा ऐसा नहीं कहते।ऐसा तुम किस प्रयोजन से कह रहे हो ..?"

नचिकेता ना माने और बार बार प्रश्न दोहराते रहे।अब पिता का गुस्सा सातवें आसमान पर था ,कृद्ध होकर बोले," जा तुझे मैं यम को देता हूं।"

नचिकेता बहुत आज्ञाकारी थे वह सीधे शरीर समेत यमलोक चल दिए।

पिता ने बहुत समझाया परंतु उनको रोक ना सके।

आखिर चौरासी लाख योजन पार कर यम द्वार पर वहाँ यम कहीं बाहर भ्रमण को गए थे।

तीन दिन बाद जब वह वापस आए नचिकेता से पूछा ,बालक तुम कौन हो ? यहाँ कैसे प्रयोजन से आए ?"

नचिकेता बोले," मेरे पिता वाजसश्रवस

हैं ,मैं उनकी बातों से सहमत नहीं था ,फलस्वरूप उनको क्रोध आ गया और मैं उनकी आज्ञा और सहमती से यहाँ आया हूं। "

यम उनकी निष्ठा से प्रसन्न हुए और बोले," मांगों वत्स तीन वरदान मांगों।"

-- पहला मेरे पिता का क्रोध शांत हो जाए व वह मुझे पहचान लें।" नचिकेता बोले।

-- तथास्तु "यम बोले।

--दूसरा पृथ्वी में दुख दूर करने के उपाय बताऐं ?" नचिकेता बोले।

यमराज ने उनको बड़ी मुश्किल से विशेष परिश्रम और शक्ति द्वारा ज्ञान दिया। जिसको वह अलौकिक दृष्टि से सीख पाए।

--तीसरा प्रश्न नचिकेता ने पूछा," मृत्यु क्यों होती है ? इसका रहस्य बताऐं ,मृत्यु के बाद मनुष्य का क्या होता है?"

यह सुनकर यमराज चौंक पड़े।

यम बोले," वत्स इसका उत्तर तो स्वयं देवों भी नहीं दे सकते..। इसके बदले तुम संसार का कोई भी सुख आराम मांग लो। मैं देने के लिए तैयार हूं परंतु यह ना पूछो।यह प्रश्न बहुत ही व्यापक और कठिन है।

नचिकेता अड़े रहे।

नचिकेता बोले," प्रभु आपने मुझे तीन वरदान देने का वचन दिया है और अब आप ही इंकार कर रहे हैं।"

उनकी पृत भक्ति और दृढ़ निश्चय पर यम प्रभावित हुए बिना नहीं रहे उन्होंने फिर उनको मृत्यु के गूढ़ रहस्य के बारे में उनको बताया। यम नचिकेता से बहुत प्रसन्न हुए।

यह बताया कि,जो अपने जीवन में अच्छे कर्म करता है उसे मृत्यु उपरांत कष्ट नहीं होता। मृत्यु परम सत्य है। इसको पारकर नई दिशा और कर्मों में मनुष्य योनी की गति मिलती है और इच्छाओं से मुक्त हो जाता है।

सुनकर नचिकेता उत्तर पाकर अति प्रसन्न हुए और यम ने उन्हें सीधे सशरीर पृथ्वी में पिता के पास भेज दिया। 

 पिता ने उस महान बालक नचिकेता को गले लगा लिया।

यही ज्ञान का सार है नचिकेता वास्तव में क्या है हमारे जीवन और मृत्यु से उत्पन्न मंथन का सार है। 


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