मित्रता समाज के नाम
मित्रता समाज के नाम
एक गांव में चार दोस्त रहा करते थे। चारों में बड़ी गहरी मित्रता थी। जहां भी देखें एक साथ ही दिखाई देते थे। साथ रहना ही पसंद करते थे। साथ रहे, साथ खाएं, साथ में पढ़ते- लिखते , हर काम वह चारों मिल कर करते थे। लोग कहते थे कि एक को बुलाओ तो चारों एक साथ ही आते हैं। ये लोग एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते, जहां देखो एक साथ ही रहते हैं। ऐसा लगता है कि इनका पिछले जन्म का कोई नाता है। चारों एक साथ बहुत खुश रहा करते थे। इनके साथ एक बड़ी समस्या थी कि यह चारों के माता-पिता अलग-अलग जात -धर्म को मानने वाले थे। ये लोग हमेशा साथ रहते ,लेकिन जब कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम, त्यौहार, शादी- विवाह आदि हो तो उन चारों को अलग रहना पड़ता था क्योंकि ये चारों एक दूसरे के यहां नहीं जा पाते थे ।सामाजिक बंधनों के कारण एक दूसरे का साथ नहीं निभा पाते थे क्योंकि समाज में सामाजिक बंधन के कारण हर समुदाय का एक बड़ा दायरा था। हर वर्ग को अपने दायरे में रहना पड़ता था, भेदभाव का शिकार होना पड़ता था, अमीर -गरीब, जात- पात, धर्म का बड़ा बंधन रहता था ।ये लोग बेचारे यह सब देखकर बड़े ही दुखी हुआ करते थे और इन्हें लगता था कि ऐसा क्या करें कि सब एक साथ मिल कर रहें। समाज के हर वर्ग को (समुदाय ) एक साथ लेकर सामाजिक क्रिया, सांस्कृतिक कार्यक्रम, धर्म आदि निभाएं, सामाजिक सौहार्द की भावना हो, विविधता में एकता का समावेश हो ,भेदभाव की भावना ना हो। उनके (गुरु जी) स्कूल के शिक्षक को इनकी मित्रता में आने वाली समस्या को देखकर बड़ा कष्ट होता था और हमेशा सोचते ऐसा क्या किया जाए की इनकी मित्रता में कोई बाधा न आए? बच्चे उनके पास बार-बार जाकर पूछते! गुरु जी हम क्या करे कि सब ठीक हो जाए और सबका एक साथ विकास हो जाए, सबका समाज में एक दूसरे के प्रति मनोभाव का सुधार हो जाए। तब गुरु जी ने बच्चों को समझाया और कहा कि हमें कुछ ऐसा करना चाहिए जहां सब कोई एक साथ आए और एक साथ सामाजिकता का परिचय दें और उन्होंने स्कूल का उदाहरण देते हुए बताया जैसे स्कूल में सब के साथ एक जैसा व्यवहार किया जाता है वहां ना कोई छोटा- बड़ा होता और ना कोई ऊंच-नीच , सबको एक साथ रहना सिखाया जाता है और सबके सामाजिक, मानसिक, व्यवहारिक , बौद्धिक स्वभाव का विकास किया जाता है ।
गुरु जी के साथ मिलकर चारों दोस्त सोच- विचार करने लगे। तब गुरु जी ने बताया कि हमारे गांव में एक आदरणीय पुरुष है जो सबके आदर्श हैं। जिनकी बातें सब सुनते हैं और बातें मानते भी है, क्यों न उनसे मिला जाए और उनसे ही कुछ उपाय पूछा जाए । तब सब मिलकर उनके पास गए और उनसे अपनी समस्त समस्याएं बताई। और पूछा कि समाज में अनेकता में एकता कैसे लाई जाए? और ऐसा क्या किया जाए कि समाज के हर वर्ग में एक दूसरे के प्रति सहानुभूति की भावना पैदा हो, साथ में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग ले सके, एक दूसरे के घर आए -जाए, किसी भी तरह का भेदभाव न हो , कोई विषमता न हो, सब एक साथ रहें । तब सम्मानित पुरुष नें उन लोगों को समझाते हुए कहा कि क्यों ना ऐसा किया जाए कि लोगों को एक दूसरे के सांस्कृतिक परम्पराओं के प्रति जागरूक किया जाए और समाज, स्वास्थ्य , शिक्षा, समाजिक शिक्षा, मौलिक विकास, मानसिक विकास के बारे में समझाया जाए और छुआछूत, भेदभाव का बंधन मिटाया जाए । तब उन आदरणीय पुरुष नें निर्णय लिया कि क्यों न समाज के लोगों को एक साथ होने के फायदे और समाज में साथ न रहने के नुकसान बताया जाए , तभी वो लोग एक दूसरे के साथ आकर रहेंगे। शुरू में तो यह सब बातें समाज में रहने वाले लोगों के लिए बेकार की लगेगी, लोगों का सामाजिक विकास, मानसिक विकास बहुत जरूरी होता है । अब ये चारों मित्र सब लोगों को (हर वर्ग के) लाकर उनसे मिलवाते और उनसे कहते कि आप समझाइस देंगे तो ही ये लोग आपकी बात मानेंगे तभी यह समस्या खत्म होगी। पहले तो ये सब लोगों को बकवास लगती थी वो लोग कहते थे कि निम्न वर्ग के लोग अब क्या हमारे बगल में बैठेंगे? कैसे दिन आ गए हैं। समाज को ये सब क्या सिखाया जा रहा है और निम्न वर्ग के लोगों का कहना था कि हम उनके बराबर के नहीं हैं उनके साथ नही बैठ सकते। क्या हम बराबरी वाले हैं कि उनके साथ उठेंगे -बैठेंगे ? जो जैसे है वैसे ही सही है तभी सही रहेगा। बार-बार कोशिश करने के बाद चारों दोस्तों की मेहनत कुछ रंग लाई और जो लोग मिलने जुलने से कतराते थे, डरते थे धीरे-धीरे हिम्मत करके आगे बढ़ने लगे और उनको समझ में आने लगा कि हमारा किसमें फायदा है और किसमें कितना नुकसान है। ये है चार दोस्तों की कहानी जिन्होंने समाज में रहकर समाज के हर वर्ग, समाज के हर समुदाय के लोगों को एक साथ रखने की कोशिश की और समाज के हर वर्ग के विकास के लिए चारों दोस्तों ने सतत् विकास के लिए प्रयास किया , लोगों को प्रेरित किया एक उदाहरण मिसाल के तौर पर प्रस्तुत किया। इन चारों की दोस्ती की लोग अभी भी मिसाल देते हैं और देते रहेंगे। अगर हर किसी की ऐसी सोच हो जाए तो समाज का हर वर्ग (समुदाय )समझदारी दिखाएं तो सही मुकाम पर पहुंचेगा और लोगों की तरक्की भी होगी। उन्होंने समाज में रहकर समाज को ऐसी सोच दी कि समाज का हर वर्ग विकास किया और करेगा और आगे बढ़ेगा।
