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vijay laxmi Bhatt Sharma

Abstract

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vijay laxmi Bhatt Sharma

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लॉक्डाउन २

लॉक्डाउन २

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प्रिय डायरी आज लॉक्डाउन २ का उन्नीसवाँ और आख़िरी दिन है पर कल से लॉक्डाउन ३ शुरू हो जाएगा... सभी से घर पर रहने और कर्मवीरों का हौंसला बढ़ाने की अपील है.... आज तो सेना द्वारा फ़ाइटर प्लेन द्वारा उड़ान भर देश के कोने कोने में सभी हॉस्पिटल, डॉक्टरों पर फूल बरसाये जा रहे हैं... हमारा भी फ़र्ज बनता है की हम भी कर्मवीरों का साथ दें उनकी समस्याओं को ना बढ़ाएँ बल्कि उन्हें कम कर घर पर रह उनका सहयोग करें।

प्रिय डायरी आजकल उत्तराखंड के बहुत सपने आते हैं जैसे जन्मभूमि बुला रही हो खींच रही है अपनी ओर.., और मै बेबस किसी चट्टान पर बैठी सोच रही हूँ की कैसे जाऊँ उस पार दूर जहां पेड़की झुरमुट तले उस पतली सी पगडंडी से नीचे उतरो तो आ जाता है मेरा प्रिय गाँव.... कभी अपने सपने मे मै अपने आप को पाती हूँ उस पुराने आम के पेड़ के नीचे शनिल की फरौक पहने बैठी हूँ और मेरे सामने मोटे मोटे बहुत सारे आम रखे हैं मै उन्हें स्वाद ले ले खा रही हूँ....... सपने भी हमे लौटा लौटा ले जाते हैं हमारे बचपन में और हम बचपन की उस निश्छल मीठी यादों की यात्रा करते करते निर्मल हो जाते हैं। 

सपने भी देखो प्रिय डायरी कितनी मिलों की यात्रा सिर्फ़ चंद ही मिनटों में पूरी कर आते है.... कई सालों का सफ़र भी कुछ ही समय मे तय कर यादों की लहरों में डुबकी लगाते हुए फिर वापस वहीं छोड़ जाते हैं... कितने सुहावने होते हैं सपने... बिना छल कपट के सीधे साधे .... 

 प्रिय डायरी ये सपने ही हैं जो हमे जीने की राह दिखा आगे बड़ने का सम्बल देते है... हमारे दुःख में एक ठण्डी फुहार बरसा मन को शान्त कर देते हैं... कभी कभी किसी समस्या का समाधान भी होते हैं ये सपने इसलिये ही तो ये लगते हैं नितांत अपने। प्रिय डायरी कल की रूपहली सुबह के सपने के साथ आज इतना ही कल ना जाने क्या अच्छा हो जाये और कोई नया सपना इन्तज़ार कर रहा हो क्या पता....

सपनों में लगती हैं सपनों सी बातें

अपनी सी लगती हैं ये सपनों की बातें।


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