vijay laxmi Bhatt Sharma

Others


4.1  

vijay laxmi Bhatt Sharma

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लॉकडाउन “एक मौका जिंदगी को समझने का”

लॉकडाउन “एक मौका जिंदगी को समझने का”

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छँट रही है धूल अभी, नई नई ज़िंदगी मिली है, क्या इसे कहूँ बीमारी या कोई नई खुशी मिली है। जी हाँ जीवन कोई बोझ नहीं जिसे ढ़ोया जाय ये तो ईश्वर की दी नियामत है जिसे ज़िंदादिली से जीना चाहिये। इस तेज रफ़्तार आधुनिक जीवन शैली ने हमारे जीने का तरीक़ा ही बदल दिया। सोने का समय नहीं, ना ही खाने का फिर परिवार तो भूल ही जाओ, एक होड़ लगी है एक दूसरे को गिरा आगे बढ़ने की होड़, ज़्यादा पैसा कमाने की होड़। जीवन ना हो रेस का घोड़ा हो गया है जिसपर दाँव खेले जा रहे हैं पर उसको कैसे सम्भालकर रखना है किसी को नहीं पता। अपनी पसंद नापसन्द भूल हम सिर्फ़ दौड़ रहे हैं और लगाम हमारी उच्च आकांक्षाओं के हाथ में है। प्रेम, रिश्ते, सम्बंध क्या होते हैं सब याद नहीं हमे।

 ऐसे ही हमारे इतने अति व्यस्त समय में एक महामारी चुपके चुपके कदम रखती है, हमारी व्यस्त कम अस्त व्यस्त ज्यादा ज़िंदगी का हिस्सा बन रहने आ जाती है और ये क्या इसने तो हमारी रफ़्तार में ही ब्रेक लगा दी, पूरी तरह से हमे नज़र बंद सा कर दिया.... हमारी उड़ान को पंगु बना दिया... क्या है भई ये कारोना महामारी जैसे कुछ करो ही ना। सब कुछ ठप्प, कोई काम नहीं, शान्ति ही शान्ति, पूरी तरह से सबकुछ बंद, देश में पूर्ण लॉकडाउन.... याद आया वो गाना “बाहर से कोई अन्दर ना आ सके, अन्दर से कोई बाहर ना जा सके, सोचो कभी ऐसा हो तो क्या हो” और वास्तव में सोचनीय स्थिति थी कोई कहीं नहीं जा सकता, किसी दूसरे राज्य में तो दूर अपने ही राज्य में भी एक जगह से दूसरी जगह नहीं जा सकता, बाज़ार, सड़क सब बंद ज़रूरी सामान ही ले सकते हैं इतना भर इंतज़ाम है। जीवन रुक गया है।

  पर वहीं दूसरी ओर कुछ अच्छा भी हो रहा था... वर्षों से बर्फ़ की तरह जमे रिस्ते पिघलने लगे थे... घर पर रहने से सँवरने लगे थे.... पुरानी रौनक़ें लौट आयीं थीं घर घर, लूडो, कैरम, ताश, ढोलक, हारमोनियम तबले सभी निकलने लगे थे। गुलज़ार थी हर बगिया माली देख हैरान था की इतने रंग के फूल थे उसके बाग में उसे कभी फुर्सत ही ना मिली इन्हें देखने की। यादों की बारात सी निकल आयी थी हर पुराना क़िस्सा सामने खड़ा था और हम उसका आनंद ले रहे थे... पुराने धूल लगे ऐल्बमों पर भी नई चमक आ गई थी वो भी महकने महकाने लगे थे.. और वहीं से याद आने लगे थे अपने पुराने शौक़ जो वक्त की गर्द में कहीं दबके रह गये थे। दिल बच्चा बन उछलने लगा तमतमाएँ फिर जवाँ हो उठीं और फिर पकड़ने लगे हम तितलियाँ, गढ़ने लगे कहानियाँ, लिखने लगे कई क़िस्से, बनाने लगे पुराने सभी व्यंजन, क्यूँकि खाने वाले सभी एक साथ जो थे, बंद रंग के बक्से को भी खोल दिया तब पता चला ज़िंदगी कितनी सतरंगी थी और हमने इसे कैद कर रखा हुआ था अपनी ख़्वाहिशों में, उच्च आकांक्षाओं में... रंग भरने लगे थे अब हम जीवन में, धीरे धीरे ज़िंदगी महक रही थी।

  जी हाँ लॉकडाउन में बहुत अनुभव हुए खट्टे मीठे कड़वे सभी पर सब में एक बात समझ आयी की जीने के लिये बहुत सीमित वस्तुओं की ज़रूरत है और हम बहुत कुछ बटोरने में लगे थे... इस लॉकडाउन ने एहसास कराया की थोड़े में भी गुजारा हो सकता है, भागने की आवश्यकता नहीं जीवन में ठहराव भी ज़रूरी हैं। परिवार की अहमियत क्या होती है धीरे धीरे घर पर रहकर इसका एहसास हुआ। साथ ही जाने अनजाने हम प्रकृति के साथ जो छेड़ छाड़ कर रहे थे उससे प्रकृति हमसे रुष्ट हो गई थी पर अब फिर निखारने लगी है, प्रदूषण कम हुआ तो आसमान नीला दिखने लगा, नदियाँ साफ़ हो गई पानी का वास्तविक रूप देखने को मिला।

   लॉकडाउन तो था पर धीरे धीरे जीवन के द्वार खुलने लगे थे, ठण्डी हवा के झोंके जीवन का रस बताने लगे थे। ये समय था जीवन को भरपूर जीने का छूटे हुए शौक़ पूरे करने का, पीछे जो छूट गया उसे जीने का। वक्त से सबक़ लेने का , एक अहम बात जो इस वक्त ने हमे सिखाई है की इच्छाओं का कोई अंत नहीं जितनी चाहो बड़ा दो पर जीने के लिये सीमित साधन ही चाहिये। बीमारी अमीरी ग़रीबी, बड़ा छोटा, पद प्रतिष्ठा नहीं देखती इसलिए किसी भी चीज का घमंड मत करो।अपनी इच्छाओं को क़म कर सबके साथ प्रेम से रह, सबको समान दृष्टि से देखना ही खुशहाल जीवन है। अंत सबका आना ही है और जैसे ख़ाली हाथ आये हैं वैसे ही खाली हाथ जाना है। अभी भी समय है बिखरे मोती उठा एक माला बुन लें तो कोई बाहरी ताक़त हमे छू नहीं सकती, इस माला की ताक़त का अन्दाज़ा इस लॉकडाउन में बखूबी हो गया। ये वक्त बहुत कुछ सिखा गया और बहुत कुछ अभी सीखना बाकी है... इस महामारी का लक्ष्य बहुत बड़ा है पर हमारी हिम्मत से बड़ा नहीं ये हिम्मत ही इसका लक्ष्य भेद करेगी। यही तो ताक़त इस लॉकडाउन में एकत्रित हुई है परिवारों की एकता, बिखरे हुए को समेटने की, प्रेम की सद्भावना की, सेवा भाव से दूसरों की मदद करने की, संतोषी जीवन व्यतीत करने की, देश हित में स्वदेशी अपनाने की आत्मनिर्भर की ओर कदम बढ़ाने की। अंत में सभी कारोना योद्धाओं को दिल से नमन जो रात दिन देश सेवा मे जुटे हैं।



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