लिफाफा
लिफाफा
एक शाम सीता अलमारी से अपना कुछ सामान निकाल रही थी की अचानक उसका ध्यान अलमारी के ड्रोवर पड़ी। ड्रोवर पर लाॅक लगा हुआ नही था। सीता जानती थी उस ड्रोवर में माँ ने एक चीज रखी है। सीता ने कई बार अपनी माँ से उसके बारे में पूछा लेकिन हर बार यह कहकर टाल देती की तेरे काम की कोई चीज नही।
आज सीता के पास मौका था की जान सके आखीर उस में है क्या?? साथ में माँ भी बहार गई हुई थी जिसे उसे रोकने वाला कोई नही था। सीता सोच रही थी की क्या करे। सालो से अपने मन में पड़े सवालो का जवाब को जाने या फिर वैसे ही रहने दे। एक बार सीता सोचने भी लगी जाने देती हूँ। माँ देखेगी तो चिल्लायेगी। सीता अपना सामान लेकर अलमारी बंद कर ही रही थी की उसे लगा, आज नही तो कभी नही, हमेशा यही सोचती रहूंगी आखीर उसमें है क्या? मैं कोई चोरी नही कर रही, सिर्फ देखकर वापीस रख दूंगी।
सीता ने अलमारी का ड्रोवर खोलती है। उसमें पड़े लीफाफे को उठाती है और लेकर बेड़ पर बैठ जाती है।
लिफाफा खोलती है तो उसमें से कागज मिलता है। सीत सोचने लगती है माँ भी ना एक कागज को उतना संभालकर रखा है। जमीन जायदाद का तो लग नही रहा। सीता वो कागज खोलकर देखती है तो उसे पता चलता है की यह खत है।
सीता ध्यान से देखती है की यह खत आखीर किसने किसके लिए लीखा है। तो पता चलता है की उसकी नानी ने उसकी माँ के लिए लीखा था।
सीता चलो देखती हूँ नानी आखीर मेरी माँ को क्या लीखा है।
बेटी सुशीला,
मैं जानती हूँ की तू मुझसे नाराज है। आज से नही बल्कि सालो से, जब से तेरी शादी की है तब से। तुने हमारे परिवार से बात करना भी कम कर दिया है। आना जाना भी बहुत कम करती है।
मैं लंबे समय से बीमार हूँ। न जाने कब चल बसूं। इसलिए मन से यह बोझ उतारकर जाना चाहती हूँ। इसलिए तुझे खत लीख रही हूँ।
मुझे पता था की पढ़ना चाहती थी। लेकिन मैंने तुझे पढ़ने नही दिया। तु बहुत लड़ी भी बहुत है मुझसे और तेरे पापा से फिर भी हम नही माने। और थोड़े समय बाद तेरी शादी करवा दी।
मैं तुझे बता दी उस वक़्त तू बड़ी नही थी परिस्थिति समझ सके इसलिए तुझे बताया नही। उस वक़्त हमारी आर्थिक स्थिति खास अच्छी नही थी। ऊपर तेरा और तेरे भाई का पढ़ाई का खर्चा भी बहुत ज्यादा था। इसलिए खर्चा कम करने के लिए तेरी पढ़ाई छुड़वा दी थी। लेकिन हां तुझ पर शादी करने की कोई दबाव नही था। मुझे मेरे फेसले पर कोई पछतावा नहीं है क्योंकि तेरे भाई को पढ़ाकर जो भी उसने कमाया उससे तेरी शादी आराम से कर पाये।
मैं बस यही कहना चाहती हूँ की मैंने कभी तेरे और तेरे भाई के बीच फर्क नही किया। बस, यही की गुस्सा छोड़ दे।
तुझे न पढ़ने देने वाली तेरी माँ।
