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Ragini Pathak

Abstract

4.5  

Ragini Pathak

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खामोशी

खामोशी

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267


बीस दिनों तक अस्पताल में रखने के बाद आखिरकार आज डॉक्टर ने राजेश को बुलाकर वही कहा जिसका उसे डर था| डॉक्टर ने कहा कि "आप इनको अस्पताल से ले जाइए। अब इनपर दवाओं ने भी काम करना बंद कर दिया है। अब कोई चमत्कार ही इनको कोमा से बाहर ला सकता है।"

राजेश को जिस बात का डर था वही हुआ। वो एक टक अपनी पत्नी मेघा को देखे जा रहा था। आज वो भावना शून्य हो चुका था। जिस पत्नी के बोलने की आदत से वो परेशान रहता था आज उसकी खामोशियाँ उसे उससे ज्यादा परेशान कर रही थी। वो लड़ना चाहता था कि क्यों?........ आखिर क्यों?

तुम अपने दिल की बात मुझसे नहीं कह पायी।..….. तुम इतना बोलती रहती थी पूरा दिन हँसी मजाक करने वाली मेघा ने इतना दर्द छिपा रखा था।........

आज मेघा को घर लाते समय उसे अपनी सत्रह साल पुरानी चुलबुली मेघा याद आ रही थी जिसे वो दुल्हन के जोड़े में इस घर में विदा करा कर लाया था। एक वो गृहप्रवेश था जो खुशियों से और रंगों से भरा लाल लिबास में था एक आज का गृहप्रवेश है जिसमें खामोशियाँ और सफेद रंग डर का साया है। उस दिन भी हम दोनों ने साथ ही घर मे प्रवेश किया था और आज भी हमदोनो ही है। तब तुमने मुझसे चुपके से कहा था

"सुनो !"अभी जो अंगूठी ढूंढ़ने की रस्म होंगी उसमें तुम हार जाना समझे।"

मैंने आश्चर्य से पूछा! मतलब की तुम

मतलब" ये की मुझे जीतना है बस और तुम्हें मुझे जीताना ही होगा।"

मेरी बात बीच में ही काट के अपनी बात रख दी थी तुमने।

लेकिन तुमने पहली और आखिरी ही वही एक जिद थी जो मुझसे की। और मैंने मान भी ली।

उसदिन तुम्हारी बचपने वाली हरकत पर और चेहरे पर खुशी देख के मुझे हँसी आ गयी। तुमने वो अंगूठी भी रख ली अपने पास जीत की निशानी समझ कर।लेकिन वो चंचल मेघा उसदिन के बाद धीरे धीरे कही गुम हो गयी। जिम्मेदारियों में मैंने भी ध्यान नहीं दिया।

देवर और ननद की शादी में सारे काम की जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया तुमने। सिर्फ नाम से ही नहीं अपने प्यार से भी भाभी माँ होने का पूरा फ़र्ज़ निभाया तुमने।

दो बच्चे हुए। सब खुश थे पर तुम ख़ामोश थी जुबान से नहीं ।लेकिन मन से ....मेघा क्यों ?जवाब दो मुझे।

"देख लो ....मैंने कमरे को पूरे लाल रंग से सजाया है। जैसा कि तुम्हे पसंद है। कुछ तुम भी तो बोलो "मेघा का हाथ अपने हाथ मे लिए राजेश सब कुछ बोले जा रहा था। मेघा देख तो सकती थी लेकिन प्रतिउत्तर कुछ भी नहीं कर सकती थी।"

तभी राजेश की माँ कमला देवी ने दवा की थैलियों को पकड़ाते हुए कहा"बेटा!जा आराम कर ले... अब मैं बैठ जाती हूं ...कुछ देर मेघा के पास.... थक गया होगा तू भी..... "

"नहीं माँ! मैं ठीक हुँ। मेरी मेघा जो मेरे साथ है।"

कमला जी आ के बेटे के पास बैठती हैं। और मेघा को देखते ही उनको याद आने लगता है.... कि कैसे मेघा ने एक बच्चे के जैसे उनकी सेवा की थी। सब कुछ बिस्तर पर ही होता था पैर दोनो टूटने के कारण..... लेकिन मेघा ने कभी उफ तक नहीं की और फफक कर रो पड़ती हैं।

तभी मेघा की देवरानी रेवा चाय ले के आती है।

भाईसाहब .. माँजी .."चाय लीजिये। "

"दीदी की दवा का समय भी हो गया हैं।"

हाँ !रेवा.." अभी देता हूं।"

रेवा ने मेघा को देखा औऱ उसकी भी आंखों में आंसू थे क्योंकि उसकी शादी मेघा की ही वजह से हो पायी थी। लव मैरिज शादी के लिए पूरा घर खिलाफ था तब दीदी ने कैसे सबको तैयार किया था?

और रेवा के आने पर भी वो हमेशा उसकी बड़ी बहन की तरह ही रही।आज सबकी अपनी यादें थी लेकिन खामोशी में..... सब मेघा को अपनी फरमाइशें सुना के जाते। लेकिन किसी ने कभी उसकी ख्वाहिशें नहीं पूछी।

"राजेश सुनो !ना"

"क्या हुआ बोलो?"

"मैं चाहती हूं कि जब मैं आखिरी सांस लूं तो तुम्हारी गोद में ..और तुम ही मुझे दुल्हन की तरह सजाना और हाँ मेरे ऊपर सफेद रंग मत डालना .....। मुझे नहीं पसंद सफ़ेद रंग.... । डर लगता हैं इस रंग से मुझे। "

"यार! तुम अब खामोश हो जाओ। अब प्लीज्..मुझे बहुत काम है।" मोबाइल पे काम करते हुए राजेश ने कहा.....

कि तभी मेघा अपना सिर राजेश की गोद में रख देती है।

"अरे! ये क्या मेघा ?उठो कोई आ जायेगा। अब हम बच्चे नहीं रहे। गोदी में सिर बच्चें रख के सोते है।"

मेघा ने कोई जवाब नहीं दिया।

"यार हद करती हो.. उठो मेघा"

राजेश ने जैसे ही मेघा का सिर सीधा किया । वो बेहोश थी उसके मुँह से सफेद झाग निकल रहा था राजेश जोर से चीख पड़ा ........मेघा।

मेघा को सब अस्पताल ले के जाते है। वहाँ डॉ ने जब कहा है कि इनका ब्रेन स्ट्रोक हो गया है।

लेकिन ऐसा किस वजह से डॉक्टर साहब......

"शायद कोई आघात या कोई चिंता कोई भी कारण हो सकता है।'

ऐसा लगा जैसे दुनिया उजड़ गयी मेरी.......सब तो थे साथ मां भाई बहन बच्चें सिवाय तुम्हारे.....।राजेश को याद आ रहा था कि कैसे उसने मेघा को खामोश रहने के लिए कहा था?

तभी सबकी नजरें मेघा पर पड़ती है जिसकी सासों की गति तेज हो गयी थी कि तभी राजेश ने मेघा के सिर को अपनी गोद में रख लिया। सब मौजूद लेकिन आज वो शर्म नहीं है।जो राजेश को हुआ करती थी जब मेघा सबके सामने उसके पास आ के बैठने की कोशिश करती या कुछ कहना चाहती।तो राजेश अभी नहीं बाद में अभी सब हैं। कभी व्यस्तता, कभी परिवार,कभी रिश्तेदार कभी कोई समस्या। बातें मन में ही रह जाती मेघा के......

राजेश की बाहों में मेघा ने आखिरी सांस ली।

आज सब कुछ मेघा की पसंद का था.... उसका लाल लहंगा भी और उसका श्रृंगार भी राजेश ने खुद ही किया। लाल जोड़े में आज जब मेघा अपने शादी की सालगिरह के दिन विदा हुई सबकी आंखों में आंसू थे।

आज के दिन जो मेघा इस घर में बहु बन के आयी थी वो चंचल मुस्कुराती हुई और बातूनी। आज की मेघा ख़ामोश.........उसकी खामोशी पूरे घर में मौजूद थी। बहुत सारे सवालों के साथ सबके बीच...

दोस्तों ये हर औरत की कहानी है, हम में से हर एक औरत के मन मे बहुत सी आशाएं दब जाती हैं जिम्मेदारियों के बोझ तले| खासतौर पर अगर महिला हाउसवाइफ है तो क्यों हम किसी के ना रहने पर ही उसकी अच्छाई देखते हैं। ये अच्छाई हम उसके रहते देख लें, उसे ये एहसास दिलाएं कि वो हमारा अभिन्न अंग है, उसकी खुशियां भी हमारे लिये महत्वपूर्ण है।

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