Dipesh Kumar

Abstract Children Stories


4.8  

Dipesh Kumar

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जब सब थम सा गया (चौदहवाँ दिन)

जब सब थम सा गया (चौदहवाँ दिन)

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लॉक डाउन का चौदहवाँ दिन

7.04.2020


प्रिय डायरी,


आज सुबह सुबह एक बहुत ही अच्छा गाना याद आ रहा था,उठने के बाद मैं तुरंत मोबाइल में वो गाना खोजने लगा। गाना "मिस्टर इंडिया"सिनेमा का था,"जिंदगी की यही रीत हैं,हार के बाद ही जीत हैं"।मैं गाना सुनते सुनते सोचने लगा की अभी जो समय चल रहा हैं उसमे कोरोना के हारने के बाद ही हमारी जीत हैं।

लेकिन जिस प्रकार आंकड़े बढ़ रहे थे,उससे लग रहा था कि जंग अभी जारी रहेगा।बस ईश्वर से यही प्रार्थना कर रहा था कि सब जल्दी सही हो जाये।

बिस्तर से उठने के बाद अपनी दैनिक नित्य क्रिया करने के बाद मैं नीचे जाकर पूजा पाठ करके नाश्त करने बैठा ही था कि कुछ प्लास्टिक बीनने वाली औरते और बच्चे गेट के पास से आवाज़ देने लगे।मैं बाहर जाकर पूछा,"क्या बात हैं क्या चाहिए"।उनमे से एक औरत बोली,"भैया कुछ खाने को दे दो।"मैंने कहा ठीक हैं पर इस समय कोरोना संक्रमण चल रहा हैं और आप लोग इस तरह मत घूमो आप लोग जहा रहते हो खाना पहुँच जायेगा"।इतने में दूसरी औरत बोली,"भैया हमारे पास कोई खाना लेकर नहीं आता"।मैंने कहा अच्छा रुको पहले मैं कुछ खाने को लेकर आता हूँ।फिर इस समस्या का समाधान करता हूँ।माँ और चाचीमाँ कुछ रोटियां और सब्जी डिब्बे में लाकर दे दी,पर मैं सोच रहा था खाना बात रहा हैं पर इनको क्यों नहीं मिल रहा?मैंने उसमे से एक औरत से पूछा की आप सब कहा रहते हो।तो उन लोगो ने कहा हाट के पास झोपड़ पट्टी में।मैंने तुरंत जो लोग खाना बात रहे थे उनके पास लगाया,तो पता चला की वह हम लोग ग्यारह बजे जाते हैं।मैंने कहा ठीक हैं कुछ लोग हैं जिनको भोजन नहीं मिल पा रहा हैं।आप लोग इन लोगो को भोजन उपलब्ध करवा दीजियेगा।

बस समस्या का समाधान हो गया,मैंने कहा आप लोग अभी बहार मत निकलना और ग्यारह बजे सुबह खाना मिल जायेगा,शाम के लिए उन लोगो से समय पूछ लेना।वो लोग ख़ुशी ख़ुशी चले गए।मैं इस महामारी से आई समस्या और परेशानी के बारे में सोचते सोचते अपने कमरे में जाने लगा।तो माँ बोली नाश्ता कर लो मैंने कहा अब मन नहीं हैं,और ऊपर आ गया।ऊपर आ कर मैं मोबाइल मैं व्हाट्सएप्प के संदेश और कोरोना संक्रमण की जानकारी देखने लगा।स्तिथि बहुत बेकार चल रही थी ।कुछ लोग मान नहीं रही हैं और मनमानी करते हुए संक्रमण फैला रहे हैं।मन बहुत ही क्रोधित हो रहा था।मैं सोच रहा था कि इन लोगो को क्यों समझ नहीं आ रहा हैं कि इस बीमारी से पहले तुम खुद संक्रमित होंगे,फिर पूरे परिवार को संक्रमित करके सबको मौत के मुँह में धकेल दोगे।

मन बहुत ही व्याकुल हो रहा था क्योंकि अब मैं भी घर पर बैठे बैठे परेशान हो गया था।लेकिन लॉक डाउन चल रहा है और यदि सबको बचाना हैं तो पहले खुद बचना होगा,क्योंकि यही कोरोना को हराने के लिए एकमात्र सरल उपाय हैं।कंप्यूटर पर कुछ देर स्कूल का काम करके खाली हुआ तो दोपहर के भोजन का समय हो गया। चाचीमाँ नीचे से आवाज़ देने लगी की खान खालो।मैं नीचे आया और सबके साथ बैठ कर खाने लगा साथ हे कोरोना की चर्चा होने लगी।इतने में नायरा बिटिया अपने कारनामो से सबको हँसाने लगी।खाना खाकर मैं ऊपर आ गया,और कुछ देर बाद रस्किन बांड की कहानी की किताब पढ़ते हुए सो गया।

जब नींद खुली तो शाम के पांच बज रहे थे ,और सिर बहुत भारी लग रहा था।मैं उठकर हाथ मुँह धोकर नीचे चला गया।सिर दर्द हो रहा था इसलिए चिड़चिड़ापन लग रहा था।मैं गमलो और पोधो मैं पानी डालकर बाहर कुर्सी पर बैठ गया।थोड़ी देर बाद मैं फिर कमरे में आ गया और सिर पर ठंडा तेल लगाकर मालिश करने लगा।थोड़ी देर बाद आराम हो गया।

शाम की आरती हो गयी थी और मैं और भाई रूपेश बाहर रोड पर खड़े थे,इतने में कॉलोनी में एम्बुलेंस आई तो मैं सोचने लगा की किसकी तबियत खराब हैं,लेकिन लॉक डाउन के चलते किसी के घर जा भी नहीं सकते थे।फिर मैंने जिस घर के पास गाडी खड़ी थी,वहा फ़ोन लगाया तो पता चला की कॉलोनी में जो नर्स दीदी हैं वो आई हैं किसी मरीज को घर छोड़कर यही आ गयी।फिर मैंने लंबी सांस ली औए भगवान् को धन्यवाद किया कि सब सलामत रहे।इसके बाद मैं कुछ देर के लिए छत पर जाकर टहलने लगा।मैं छत पर टहलते टहलते गाने सुन रहा था,और आस पास का सन्नाटा भी महसूस जार रहा था।रात के खाने का समय हो चूका था।चाचाजी और भाई रूपेश का मंगलवार का उपवास था,तो वो लोग भोजन कर चुके थे।पिताजी और मैंने भोजन किया और रेम्बो को लेकर कुछ दूर टहलने निकल गया।खेतो मैं गेहूँ निकल रहा था और बहुत धूल हो रहा था इसलिए हम लोग वापिस लौट आए।कुछ देर वार्तालाप के बाद सब अपने कमरे मे चले गए।मैं भी अपने कमरे में आ गया।सर मैं दर्द हो रहा था।

आज बिलकुल भी पढ़ने का मन नहीं था।लेकिन कहानी का आज का भाग लिखना था तो मैं कहानी लिखने लगा।कहानी लिख कर मैं अपने बिस्तर पर लेटा तो सिर दर्द करने लगा।फिर मैं उठ कर दवाई खाने लगा और बाम लगाकर सोने की कोशिश करने लगा।


इस तरह आज का दिन भी समाप्त हो गया।लेकिन अन्य दिनों की अपेक्छा आज का दिन बहुत ही तनावपूर्ण था,और बस सब जल्दी ठीक हो जाये इसी उम्मीद के इंतेजार में था।लेकिन कहानी अभी अगले भाग में जारी हैं..........



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