Dipesh Kumar

Drama Horror Thriller


4.8  

Dipesh Kumar

Drama Horror Thriller


हॉस्टल का बंद कमरा

हॉस्टल का बंद कमरा

5 mins 201 5 mins 201

बात उन दिनों की हैं जब सतीश और राज ने कॉलेज में एडमिशन लिया था। दोनों अलग अलग जगह से थे। लेकिन कॉलेज का माहौल ही ऐसा होता हैं कि सब एक दूसरे से घुल मिल जाते हैं। सतीश और राज को एक ही हॉस्टल में एक ही रूम मिला था। इसलिए दोनों बहुत खुश थे। हॉस्टल में पहुँचने के बाद उनके और भी कई मित्र बने। धीऱे धीऱे सब दोस्त बन गए। साथ में पढ़ना खाना रहना। सतीश और राज भी बहुत खुश थे क्योंकि हॉस्टल के सभी छात्र पहली बार अपने घर से निकले थे। पहले सेमेस्टर की परीक्षा के बाद लगभग सभी बच्चे अपने घर जाने को तैयार हो गए।

लेकिन सतीश और राज साल में सिर्फ एक बार ही घर जा सकते थे। हॉस्टल बहुत छोटा था और उसमे केवल 50 कमरे ही थे,लेकिन उसमें से एक कमरा किसी को भी रहने को नहीं दिया गया था।

वो हमेशा से बंद रहता था। ये हॉस्टल केवल प्रथम वर्ष वाले छात्रों को ही दिया जाता था उसके बाद दूसरे और तीसरे वर्ष के लिए कॉलेज के पास का ही हॉस्टल हैं। सेमेस्टर परीक्षा के बाद लगभग सभी बच्चे चले गए। सतीश और राज पूरे हॉस्टल में अकेले थे। हॉस्टल के गार्ड मैंन गेट पर ही रहते थे। रात में सतीश और राज से आकर कहा कि बेटा,"आप लोग छुट्टियों में घर नहीं गए?"इतने में सतीश ने कहा,"गार्ड अंकल हम लोग का घर दूर हैं और साल में सिर्फ एक बार ही घर जा सकते हैं। "गार्ड ने कहा,"बेटा आप दोनों रात में डरोगे तो नहीं। " ये सुनकर राज जोर जोर से हँसने लगा और बोला,"अंकल जी कही आप मत दर जाना,मुझे किसी चीज़ से डर नहीं लगता हैं। "

गार्ड कई सालों से इस हॉस्टल में काम कर रहे थे। उन्होंने कहा,"बेटा देखो आप लोग बहादुर हो फिर भी अगर डर लगे तो मुझे आवाज़ लगा देना और उस बंद कमरे के तरफ मत जाना। "उस बंद कमरे का नाम सुनकर राज ने तो बात पर ध्यान नहीं दिया। लेकिन सतीश का ध्यान उस बात पर गया।

वो कुछ देर के लिए चुप हो गया और फिर कहने लगा,"गार्ड अंकल उस बंद कमरे में क्या हैं?"गार्ड ने कहा,"बेटा कुछ नहीं हैं। "लेकिन सतीश समझ गया था कि जरूर कोई न कोई बात जरूर हैं। इसलिए सतीश ने राज से कहा,"चलो आज गार्ड अंकल के पास ही चलते हैं",राज ने कहा अंकल के पास क्या करेंगे। तो सतीश ने कहा,"पहले चलो फिर बताता हूँ।

सतीश और राज ने अपने कमरे में ताला लगा कर गार्ड के पास जाकर बैठ गए,इतने में सतीश ने कहा,"गार्ड अंकल आपसे एक अनुरोध हैं कि आप हम दोनों को उस कमरे की कहानी बताइये। अंकल ने पहले मन किया लेकिन फिर कहानी चालु की "हॉस्टल का बंद कमरा"

सतीश और राज गार्ड अंकल के पास ही अपनी कुर्सी लगा कर बैठ गए और फिर शुरू हुई कहानी। अंकल ने बताया कि बहुत साल पहले की बात हैं,जब इस हॉस्टल में चौथे बैच के छात्र आये थे। उस समय छात्रों को अच्छे बुरे का कोई फर्क जल्दी नहीं पता चलता था। उसी वर्ष एक बहुत ही सीधा साधा छात्र भी एडमिशन लेकर पढ़ने इसी हॉस्टल में आया था। लेकिन अन्य छात्रों को उसका हमेशा पढ़ते रहना अच्छा नहीं लगता था।

इसलिए कुछ शरारती बच्चे हमेशा उससे परेशान करते रहते थे।

वो लड़का पढ़ने में बहुत अच्छा था और बड़ा अधिकारी बनना चाहता था। इसलिए दिन रात मेहनत करता था। एक दिन की बात हैं सभी शरारती लड़को ने मिलकर उसे परेशान करने का प्लान बनाया और उसको डराने का प्लान बनाया। एक दिन वो रात में पढ़ रहा था तभी कुछ लड़के आये और उसके कमरे का दरवाजा पीटने लगे। लेकिन वो जानता था कि वो सब उससे परेशान करेंगे। इसलिए उसने दरवाजा नहीं खोला।

लेकिन लड़के इतने शरारती थे की उसको बहुत देर तक परेशान करते रहे। लेकिन उसने दरवाजा नहीं खोल कुछ देर बाद जब सब एकदम शांत हुआ तब वो दरवाजा खोलकर बाहर आया और पानी लेने गया। इसी बीच लड़को ने उसके कमरे में घुसकर उसको डराने के लिए छुपकर बैठ गए।

उसने ध्यान नहीं दिया और आकार फिर पढ़ने बैठ गया। थोड़ी देर बाद उसको तरह तरह की आवाज़ करके अंदर छिपे लड़के परेशान करने लगे। ये सब सुनकर उसको डर लगने लगा। उसने सोचा की हो सकता हैं ज्यादा रात हो गयी हैं इसलिए नींद के चलते ये हो रहा होगा। उसने अपनी किताब बंद की और जैसे ही मुड़ा उन लड़कों में से एक ने उसको जोर से आवाज़ करके डरा दिया।

आवाज़ सुनकर वो डरकर तुरंत गिर गया और बेहोश हो गया। इतने में बाकी शरारती लड़के भी उसके कमरे में आ गए और जोर जोर से हँसने लगे। लेकिन कोई उसको उठा नहीं रहा था। उसका दरवाजा बंद करके सब चले गए और सोचे की कुछ देर बाद उठ जायेगा। लेकिन जब सुबह उसका कमरा खोला गया तो वो मर चुका था। हॉस्टल में पुलिस आ चुकी थी और पूछताछ चल रही थी। लेकिन कोई बात सामने नहीं आई।

उन लड़को  की गलती से वो लड़का दिल के दौरे से मर गया था। तभी से वो कमरा बंद हैं। आज भी जब हॉस्टल में कम बच्चे रहते हैं तो आधी रात के बाद कभी कभी दरवाजे पीटने की आवाज़ आती हैं।

ये कहानी सुनने के बाद राज एकदम से चुप हो गया और जिस तरह बोल रहा था कि उसको डर नहीं लगता हैं। अब उसके चेहरे से साफ़ दिख रहा था। लेकिन सतीश जान चूका था कि बात कुछ और हैं इसलिए उसने गार्ड अंकल से कहानी सुनी। दोनों बच्चो को डरता देख गार्ड ने कहा बेटा डरो मत। ये सिर्फ एक कहानी थी। इतना बोलते ही राज ने कहा क्या सच में ये कहानी थी क्या?गार्ड ने कहा हाँ ऐसा कुछ भी नही हैं। तब दोनों की जान में जान आई। लेकिन गार्ड जानता था कि ये कहानी कहानी नहीं सत्य घटना हैं लेकिन सतर्क करने के यही एक माध्यम था !


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