हु विल बेल द कैट?
हु विल बेल द कैट?
आज शाम को बहुत दिनों के बाद उससे बात हो रही थी। वह मेरी पुरानी कलीग थी। शायद ऑफिस से वह घर जा रही थी क्योंकि बीच बीच में कैब वाले को डायरेक्शन देने की आवाज़ आ रही थी। हाँ, लेफ्ट लीजिये…राइट चलिए…उसके साथ मेरी अंडरस्टैंडिंग इतनी जबरदस्त थी की उसका लेफ्ट भी मुझे राइट ही लगता था।
वह बेहद कॉंफिडेंट थी। जब हमे काम की समझ होती हैं तो एक अलग लेवल का कॉन्फिडेंस नज़र आता हैं। मीडिया में काम करती थी तो उसको अपडेट रहना होता था। रेफरेन्स के लिए वह किताबें पढ़ती थी। काम के सिलसिले में नयी जगह जाना… नये दोस्त बनाना…उसे अच्छा लगता था।
किसी भी फीमेल के लिए मीडिया में जगह बनाना आसान काम तो नहीं हैं।उसका हार्ड वर्किंग नेचर… काम में पकड़…प्लीज़िंग पर्सनैलिटी…सबसे मुस्कुराकर बात करना…किसी को अपना बनाने के लिए और क्या चाहिए होता हैं?
हाँ...तो हमारी बातें होने लगी… क्योंकि हम मीडिया हाउस में काम करते थे तो हमारी बातें आज के फ़ास्ट और ग्रोइंग मीडिया चैलेंजेस, सर्वाइवल, काम करने की आज़ादी पर बात होने लगी। उसने साथ में जोड़ा की बॉस पर भी बहुत सारी चीज़ें डिपेंड करती हैं। मैंने कहा, डेफिनेटली…क्योंकि बॉस अगर सपॉर्टिव हैं तो काम की क्वालिटी निकल कर आती हैं और बॉस नेगेटिव हैं तो क्रिएटिविटी जैसे मर सी जाती हैं…बातचीत के दौरान मैंने कहा, "आजकल संध्या दिखायी नहीं दे रही हैं? क्या उसने एंकरिंग बंद कर दी हैं?"
"अरे, नहीं मैडम… आपको पता नहीं? आजकल सारी एंकर्स न जाने क्या क्या बातें करने लगी हैं…एक्सप्लॉयटेशन.. अनवांटेड डिमांड्स… नौकरी से निकालने का डर…" मुझे थोड़ा अंदाज़ा तो था लेकिन कंडीशन इतनी सीरियस होगी इसका आईडिया नहीं था। मैंने कहा, "इस हालात में लड़कियों को कितना स्ट्रगल होगा? ये कंडीशन एंकर्स के लिए तो और भी ज़्यादा डिफिकल्ट होती हैं क्योंकि उनको तो हर हाल में प्रेजेंटेबल दिखना होता हैं…सुंदर दिखना होता हैं…इस तरह के अनकहे स्ट्रेस के साथ कोई कैसे प्रेजेंटेबल दिख सकता हैं?"
वह कहने लगी, "लेकिन सब करना पड़ता हैं…एवरीबॉडी हैज फ़ैमिली…" मैंने कहा, "इतनी सारी एंकर्स हैं…क्यों नहीं वह बात करती हैं? मैडम, इतना आसान लगता हैं आपको? आप तो जानती हैं… एवरी वन इज स्केयर्ड…एवरी वन वांटेड टू सेव देअर जॉब… यू नो, वर्किंग इन मीडिया इज अगेन ए चैलेंजिंग जॉब…शिफ्टिंग की प्रॉब्लम…असाइनमेंट का पूरा होना…मंथ एंड सेलरी आना…"
जिस तरह से वह बातें कह रही थी मुझे इतना डिटेल्ड आईडिया नहीं था। मीडिया में प्रॉडक्शन और टेक्निकल डिपार्टमेंट होते हैं। मैं क्योंकि टेक्निकल डिपार्टमेंट में थी तो मुझे प्रॉडक्शन के स्टाफ का आईडिया नहीं था।उड़ती उड़ती कुछ ख़बरें आती तो थी…मुझे एंकर्स, प्रोड्यूसर्स, एडिटर्स इत्यादि मिलते रहते थे… ख़ासकर एंकर्स तो हमेशा ही मुस्कुराकर मिलती थी…मुझे लगता था की मुस्कान तो उनके काम का पार्ट हैं लेकिन वह तो मुस्कुराकर जैसे अपने सारी प्रॉब्लम्स को छुपाती रहती थी…
मैंने थोड़ा ज़ोर देकर कहा, "इन यंग एंकर्स को इस तरह से स्ट्रेस्ड माहौल में काम नहीं करना चाहिए…इट मे अफेक्ट देअर हेल्थ…उनको बॉस के बिहेवियर की शिकायत करनी चाहिए… बट हु विल बेल द कैट??"
वह थोड़ा पॉज़ लेकर आगे कहने लगी, "और आप जानते ही हैं की डायरेक्टर बॉस के फ्रेंड हैं… अँन्ड ही इज आल्सो मेल…और सभी फीमेल स्टाफ यह भी जानती हैं की ऑफिस में हैरेसमेंट अँन्ड एक्सप्लोइटेशन ख़त्म करने कि लिए पॉश जैसी सहूलियत है उनके पास… लेकिन क्या वह कारगर है? आज भी समाज, ख़ुद ऑफिस का ही स्टाफ, शिकायत करने वाली स्त्री को ही दोषी ठहराता है की वो क्यों हैरेस? बॉस ने उसका काम करने से मना किया होगा इसलिए अब शिकायत कर रही है …इतना बुजुर्ग आदमी है बॉस वो कहाँ कुछ कर पाता होगा? आजकल की औरतें अपने प्रोफेशनल करियर में जल्दी सफलता हासिल करने के लिए कुछ भी कर सकती हैं… कुछ उल्टा हो गया तो यूँ ही इतने बड़े आदमी पर लाँछन लगा देना…जितने मुँह उतनी बातें…"
सही तो कह रही थी वह…एकदम प्रैक्टिकल बात…
बात हू विल बेल द कैट पर ख़त्म नहीं होती बल्कि घंटी बंध जाने के बाद वो बिल्ली हर जगह जगह रो रो कर उस महिला पर कीचड़ ही उछालेगी… और सिस्टम भी उसका ही साथ देगा। इस बात को ऑफिस की हर फीमेल जानती हैं…इसी से हर महिला को डर लगता है…वह यह भी जानती हैं की यह प्रोसेस इतना आसान भी नहीं होता हैं… ऑफिस का पूरा सिस्टम बदल जाता हैं… कल तक जो स्टाफ उसे सपोर्ट करता था अब वह उससे कन्नी काटेगा? ज्यादातर इस सब लड़ाई का सबक और मार उसको ही मिलेगा…जीत कर भी स्त्री के ही हिस्से में क्या आता है? उल्टा वर्षों तक ये बात उसके दामन से चिपक जाती है की उसने कभी किसी की शिकायत की थी और उसके करीअर में भविष्य में आने वाले न जाने कितने मौके यूहीं स्वाहा हो जाते हैं…हक़ीक़त में डर यही है… तो बात पक्की हो गयी हैं अब… नो वन विल बेल द कैट…
हमने बातें ख़त्म की… लेकिन क्या बातें ख़त्म हो गयी थी?? शायद बात तो अब शुरू हो गयी थी…
