Sagar Mandal

Abstract


2  

Sagar Mandal

Abstract


हिजड़ा -एक अधूरी औरत

हिजड़ा -एक अधूरी औरत

4 mins 76 4 mins 76

“कहानी” हम सबकी जिंदगी एक कहानी है, किसी की चटपटी किसी की घिसीपिटी, कोई अपनी ज़िन्दगी से खुश नहीं हैं और कोई थोड़े मैं बहूँ त ज्यादा खुश हैं। मैं सबसे अलग कहानी खोजता हूँ , मैं एक लेखक हूँ। इसी दौरान मैं नए नए जगह पर जाता रहता हूँ कहानी की तलाश में। एक दिन मैं गोरगाँव जा रहा था। बस के पहले सिट पर बैठ मैं किताब पढ़ता हूँ और ये बस छूटने की राह देख रही थी। बस यात्रियों से भर चुकी थी और चलने को तैयार थी। एक पति पत्नी अपने पांच वर्ष के बच्चे को लेकर मेरे सामने के सिट पर बैठे थे। बच्चे के हाथ में पांच रुपये का सिक्का था जिस से वो खेल रहा था। बच्चे की माँ ने जब बोला “पैसा मुझे दे दे तू गिरा देगा तू इसे कहीं” तो बच्चे ने ध्यान नहीं दिया वो अपने ही मन मैं मगन था। तभी एक प्रोढ़ उम्र का हिजड़ा बस में चढ़ा, लाल रंग की साड़ी पहने होठों पर गाढ़ा लिपस्टिक पोती हुई थी। बस में चढ़कर उसने तली बजाकर पैसा लेना शुरू कर दिया। किसी के लिए वो घृणा का पात्र थी और किसी के लिए मनोरंजन का कारण। मैं पढ़ना छोड़ ये सब देख रहा था इतने में वो मेरे सामने आई और ताली बजाकर पैसा मांगने लगी मैंने अपना पर्स निकला और बीस रूपया उसके हाथ मैं दे दिया।

ताली बजाते हुए वो पैसे मांगते मांगते बस के पीछे की और गयी इतने मैं मेरे सामने वाला वो पांच वर्ष का बच्चा ने जोर से पुकारा “माँ।" उस हिजड़ा ने ये ध्यान नहीं दिया बच्चे ने फिर से बुलाया “माँ” इस बार उसने सुना पर उस तरफ देखा नहीं। उस बच्चे को उसके माँ ने रोकने की कोशिश की पर बच्चे ने पूर्ण शक्ति से आवाज़ “ओ ताली बजाने वाली माँ........।" इस बार एक झटके से हिजड़े ने पलट कर देखा। तभी एक व्यक्ति ने उसे देने के लिए एक नोट निकाल लिया था। उस हिजड़े ने वो नोट पकड़ भी लिया था लेकिन उस हिजड़े ने उस नोट को छोड़ दिया। बच्चे की माँ ये देख बच्चे को रोकना बंद कर दिया। हिजड़े के भाव बदल गए थे उसके मुहँ से बस इतना निकला “हाँ मेरे बच्चे।" बच्चे ने वो सिक्का हिजड़े को दिखाते हुए कहा “माँ ये भी ले लो।" ये शब्द माँ एक बार और सुनकर हिजड़े की आँखें जो अब तक नम सी थी अब उनसे पानी चेहरे पर आ चुका था। जो हिजड़ा अब तक लोगो की घृणा और मनोरंजन का पात्र थी शायद उसे अपना वजूद भी मिल चुका था। इसी बीच उस हिजड़े को एक ध्यान आया वो जो भी पैसा उसने लिया था सब से उसे लौटा दिया सबको, मुझे भी बीस रूपया लौटा दिया। तभी बच्चे की एक और आवाज़ आई “माँ आजा।" हिजड़े ने एक रुंधी हूँ ई आवाज़ में कहा “आ गयी मेरे बच्चे।" बच्चे के छोटे से हाथों से हिजड़े ने वो सिक्का लिया और उसे चूम कर माथे लगाया और ऊपर सर उठाकर भगवान का धन्यवाद किया। बस में सभी इस दृश्य को देखकर अवाक थे। हिजड़े की आँखों से अब अविरल अश्रु धारा बह रही थी। हिजड़े की जिन आँखों थोड़ी देर पहले मादकता थी अब वो वात्सल्य से भर चुकी थी। हिजड़े ने बच्चे के सर को चूमा, हिजड़ा बुदबुदा कर बच्चे को दुआएँ दे रहा था। हिजड़े ने अपनी एक थैली में से 100 रूपये निकाल कर बच्चे के हाथ पर रख दिए। बच्चे की माँ ने उसे रोकते हुए कहा “ये क्या कर रहीं हैं आप।" हिजड़े ने अपने दुपट्टे से अपना मुहँ पोछा और बोला “बीबी आज से मेरी उम्र भी इसके नाम और इसके सारे दुःख मेरे नाम, बीबी तेरा बेटा है तुझे बना रहे, भगवान सुखो से तेरी जिन्दगी भर दे।" हिजड़े ने फिर से आंसूओं से भीग चुके चेहरे को दुपट्टे से साफ़ किया और बच्चे के चेहरे को अपने हाथों में लेकर चूमा और बोला “बीबी मुझे तो पैदा होते ही मेरी माँ ने भी रिश्ता तोड़ लिया था, हम हिजड़ों का जनम होता ही ऐसा है।

बीबी जिन्दगी में पहली बार आज इस बच्चे ने माँ कहा तो लगा… हाँ मैं भी इंसान हूँ। बीबी इस बच्चे ने मुझे क्या दे दिया तू ना समझेगी।" मैं ये सब देख रहा था बैठे अब वो मेरे लिए हिजड़ा न थी मैंने उन्हें पुकारा “दीदी...”

वो मेरे तरफ मुड़ी, मैंने बोला-“दीदी आप बहुत सुंदर हो चेहरे से भी और मन से भी”

उन्होंने मुस्कुराया और मुझे दुआएँ दिया और बस रुकते ही वो उतर गयी।

मेरी कहानी मुझे मिल चुकी थी और साथ में सिख भी।



Rate this content
Log in

More hindi story from Sagar Mandal

Similar hindi story from Abstract