STORYMIRROR

Kunda Shamkuwar

Abstract Drama

4  

Kunda Shamkuwar

Abstract Drama

एक शहर के ख़्वाब

एक शहर के ख़्वाब

1 min
356

हाल ही मैंने हॉस्पिटल में रजिस्ट्रेशन का काम करना शुरू किया। पेशंट्स की हिस्ट्री लिखतें हुए मुझे लगने लगता था जैसे मैं उनके ख़्वाबों को लिख रही हुँ। 

रजिस्ट्रेशन के वक़्त लिखें जाने वाली उस मामूली जानकारी को टाइप करते हुए जैसे मैं उन लोगों के साथ किसी अनाम रिश्तें में बँधने लगती। 

मेरी इस नयी नयी नौकरी में मुझे लगने लगा की मेरे पास जैसे शहर के हज़ारों ख़्वाबों की चाबी है...मैं अपने ख़्वाबों को 

फिर भूलने लगती....

लेकिन कुछ सालों के बाद इस शहर का माहौल बदलने लगा। महजब, नफ़रत, दंगे, आगजनी और लूटपाट वाले इस माहौल में लोग बदलने लगे थे...भीड़ में से किसी ने हॉस्पिटल को ही आग के हवाले करने की कोशिश की.... लगा की बस अब सबकुछ ख़त्म..... लेकिन वहाँ एडमिट उन सारे ज़हनी मरीजों ने भाग भाग कर आग बुझा दी....इस शहर के ख़्वाब जो कागज़ों की सूरत में दर्ज थे बच गये....

शहर में ज़हनी मरीज कौन है ? मेरे पास इस सवाल का कोई जवाब नही था.... 


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Abstract