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Manju Saraf

Abstract

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Manju Saraf

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अपनी बारी

अपनी बारी

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गर्दन में तकलीफ होने के कारण अस्पताल गई ,वहां मरीजों की लाइन लगी थी ।डॉक्टर साहब से मेरी अच्छी पहचान थी , चाहे तो मैं अपना नाम बता साइड से अंदर जाकर इलाज करवा सकती थी पर लाईन में सभी उम्र के लोगों को देख मैने निर्णय लिया , मुझे भी इन्हीं लोगों के साथ खड़े रहना चाहिए।

मेरे आगे गाँव की एक बुजुर्ग महिला थी जिसके घुटनों में बहुत ज्यादा तकलीफ थी वह जमीन पर बैठ गई अपनी बारी की प्रतीक्षा में।

  धीरे धीरे आगे बढ़ किसी तरह नम्बर आया करीब आधे घण्टे बाद उसका जैसे ही उसने, अंदर जाने पर्दा हटाया डॉक्टर साहब की नज़र मुझ पर पड़ गई ,मुझे देखते ही उन्होंने कहा -"अरे आइये मैडम आप लाइन में क्यो खड़ी हैं सीधे अंदर आ जाना था आपको " 

उस बुजुर्ग महिला को उन्होंने बाहर जाने कहा कि "थोड़ी देर प्रतीक्षा करो पहले मैडम को देखेंगे , "

उसका निराश चेहरा देख मैंने कहा -"नहीं डॉक्टर साहब पहले उसे ही देखिये , वह खड़ी भी नही हो पा रही , उसके लिए अपनी बारी की प्रतीक्षा करना भी बड़ा मुश्किल था , मैं कुछ देर वेट कर लूँगी ।"

 डॉक्टर साहब कभी उसका चेहरा देखते कभी मेरा चेहरा देखते रहे ।



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