आलिंगन
आलिंगन
अचानक से पत्तों का हिलना, चिड़ियों का चहचहाना, सूरज का आगे बढ़ना, एकाएक सब रूक गया, मानो वक्त थम -सा गया!
वातावरण में चारों ओर पशुओं के चिंघारने की भयानक आवाजें... जैसे कुछ अजीब ही घटने वाला हो, ऐसा संकेत दे रहा था । सभी लोग घर से बाहर निकलकर स्तब्ध एक दूसरे को देख रहे थे। समय अधिक विकराल होते जा रहा था ।
"चलो..चलो आयाची संत के पास, वह त्रिकालदर्शी हैं ,हमें जरूर बताएंगे कि क्या आज सच में प्रलय होने वाला है ? यह कहते हुए कुछ लोग मंदिर की तरफ भागने लगे।
संयोगवश सबको संत के दर्शन हो गये। सभी एक साथ चिल्लाए, "बाबा बताइए ,"अभी एकाएक प्रकृति में ऐसा क्या हो गया ? चहुं ओर घोर अंधेरा छा गया! पेड़ खामोश हैं ! हवा नहीं सिसकती! दिन ठहर -सा गया है ! बचाइये हमें , हमलोग बहुत घबरा रहे हैं। हमारे बच्चे घर में विलाप कर रहे हैं।
संत ने शांत भाव से मुस्कुराकर कहा,
"वत्स! चिंता की बात नहीं है, दो अतृप्त ,भटकती आत्माओं का आज मिलन हो रहा है । संत के मुँह से इतना निकलते ही गर्जन के साथ तेज़ बारिश होने लगी । आकाश और धरा एक ही रंग में रंग गये ,मानो दोनों एक-दूसरे का आलिंगन कर रहें हों।
भयंकर बारिश के कारण दोनों के बीच फासलों का नामो-निशान मिट गया। तेज हवा बहने लगी, पक्षियों का मधुर कलरव वातावरण में फिर से सुनाई पड़ने लगा । दिग दिगंत गुंजयमान हो उठा। वर्षों से प्यासी धरती आज तृप्त हो गई ।
इस अद्भुत मिलन को देखकर सूरज इतना शर्मा गया कि वह सफेद रेशमी चादर ओढ़ कर निश्चिंत से सो गया ।
