ज़िन्दगी ज़िंदा दिल (सुरेश कौंडल)
ज़िन्दगी ज़िंदा दिल (सुरेश कौंडल)
हो ज़िन्दगी वो
जो किसी के काम आ जाये।
हो चेहरा वो
जो किसी चेहरे पर मुस्कान ले आये।
ना कोई मुफ़्लसी हो
न कोई भी हो मजबूरी।
हो राह-ए- ज़िन्दगी ऐसी
जो किसी मुकाम पर पहुंचाए।
मिल जुल कट जाए
हर सुख और दुःख जीवन में।
हो घर ऐसा
जहां हर कोई खुल कर हंस पाए।
चाहे लाख डूबा हो
ज़माना इन गमों इन आंसुओं में।
हों बारिशें वो
जिनमें भीगने का मज़ा आ जाए ।।
चमकते लाख चाहे ये
चाँद-ओ-तारे आसमां में।
देख नूर चेहरे का
ये चांदनी भी शरमा जाए।
छोड़ दो ये मायूसी
जियो ज़िंदा दिल जीवन में।
हो जवानी में रवानगी ऐसी
कमबख्त वक्त भी ठहर जाए ।।
कद्र करनी है जीवन की
तो फिर इस पल की तू कर ले।
क्या फायदा पछताने का
जब ये वक्त ही गुज़र जाए।
