ज़िन्दगी के मसौदे तैयार हुए
ज़िन्दगी के मसौदे तैयार हुए
समय के फासलों को पार करती जिंदगी,
साँसों पर लम्हे का उधार मांगती जिंदगी !
चल रहा है सब यहाँ सिर्फ चलने के लिए,
जिंदगी अफसोस बस हाथ मलने के लिए !
हर अफसोस का इकरार करती जिंदगी,
वक्त के फासलों को यूँ पार करती जिंदगी !
उठ करके एक लहर किसी समंदर में खो गयी,
जिंदगी तूफानों के हवाले बड़ी आसानी हो गयी!
वक्त के तूफान से तकरार करती हुई जिंदगी,
हर रोज एक सबक का इजहार करती हुई जिंदगी!
हैं किनारे दूर अभी-मुश्किलें भी भरपूर हैं अभी,
हालतों के भँवर की एक नाव तैयार करती जिंदगी !
सफर के मसौदे का पूरा इजहार करती जिंदगी,
हर बार उम्मीदों से नया कोई करार करती जिंदगी!
