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नवल पाल प्रभाकर दिनकर

Drama


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नवल पाल प्रभाकर दिनकर

Drama


ये आंखें

ये आंखें

1 min 189 1 min 189

नही ये आंखें

मेरे देश की नही हैं।

मेरे देश की आंखों में

शर्म लाज का भाव है

चंचल इधर-ऊधर भटकती

दूसरे देशों की ओर मटकती

नही ये आंखें

मेरे देश की नही हैं।


पलकें झुकी-झुकी सी

निगाहें एक जगह रूकी-सी

आंखों में एक अनोखी चमक

बड़ों की इज्जत की कसक

हां ये आंखें ही

मेरे देश की आंखें हैं।


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