Kunda Shamkuwar
Abstract
कुछ यादें सिगरेट की
राख की तरह होती है
बस जरा सा झटकते ही गिरकर
आँखों के साथ साथ दिमाग
से भी ओझल हो जाती है
कुछ यादें सुलगती हुई
गीली लकड़ी की राख के जैसी होती है
बस गिरती रहती है धीरे धीरे
और सुलगती रहती है दिल में
बिलकुल गीली लकड़ी की तरह.....
लाइफ़ इज वैरी...
कहानी में कवि...
कैफ़ियत
नदी की धार सी...
ग्रोइंग अप…
ख़ामोशियाँ
हमसफ़र
एक औरत में कि...
जॉइंट एकाउंट
तुम नही...
एक समुद्र मंथन हुआ था, जिसका विष शिव जी ने पिया था, एक समुद्र मंथन हुआ था, जिसका विष शिव जी ने पिया था,
पैसा कमाने हेतु समय है पर रिश्तों को जोड़ने के लिए समय का अभाव है, पैसा कमाने हेतु समय है पर रिश्तों को जोड़ने के लिए समय का अभाव है,
होली पर हम मिठाई भी खाते, जीवन में मिठास भरते, होली पर हम मिठाई भी खाते, जीवन में मिठास भरते,
टूट जाते हैं वादे कभी कभी मगर जानते हुए अंजान बनना नहीं था।। टूट जाते हैं वादे कभी कभी मगर जानते हुए अंजान बनना नहीं था।।
होता जगत में कैसे, तुम बिन मेरा गुज़ारा। होता जगत में कैसे, तुम बिन मेरा गुज़ारा।
जब दिल भर गया तोह पतली गली पकड़ ली जब दिल भर गया तोह पतली गली पकड़ ली
अब शामें चकाचौंध से जगमग सी जगमगाती हैं अब शामें चकाचौंध से जगमग सी जगमगाती हैं
तुम लौट के ना आओगे, यह दिमाग कहता ही रहा। तुम लौट के ना आओगे, यह दिमाग कहता ही रहा।
पर अब बड़े होने पर हर ग़लती पर डांट मिलती पर अब बड़े होने पर हर ग़लती पर डांट मिलती
राह में खतरे बड़े थे और फिसलन भी बहुत। राह में खतरे बड़े थे और फिसलन भी बहुत।
गिरता जल आसमानों से बनती पहचान जमाने से गिरता जल आसमानों से बनती पहचान जमाने से
ईश्वर के हाथ फिर क्यों करना उम्र का लिहाज ईश्वर के हाथ फिर क्यों करना उम्र का लिहाज
गिरे हुए पीले पत्ते तीखे भी थे और कड़वे भी। गिरे हुए पीले पत्ते तीखे भी थे और कड़वे भी।
लक्ष्य भी ऐसा बनाइए जो आपके सपनों से मेल खाता हो। लक्ष्य भी ऐसा बनाइए जो आपके सपनों से मेल खाता हो।
फिर धीरे से वह चाँद बांध गया मेरे मन के फिर धीरे से वह चाँद बांध गया मेरे मन के
वैसे ही सत्य होता नहीं कभी कहीं विचलित, कितना भी करें सच को झूठ तापित श्रापित। वैसे ही सत्य होता नहीं कभी कहीं विचलित, कितना भी करें सच को झूठ तापित श्रापि...
कर बैठी थी एक खता लोगों के लिए था हमने जीना चाहा कर बैठी थी एक खता लोगों के लिए था हमने जीना चाहा
जेनरेशन बदल गई? या लोग बदल गए? या खुशियों से जलन होने लगी है? जेनरेशन बदल गई? या लोग बदल गए? या खुशियों से जलन होने लगी है?
सूरज बनने की चाहत में, लाखों....... दीपक , जलते रहते हैं, सूरज बनने की चाहत में, लाखों....... दीपक , जलते रहते हैं,
इक फोन के बटन से मुश्किलों का हल मिला इक फोन के बटन से मुश्किलों का हल मिला