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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Abstract

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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

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ध्यान

ध्यान

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सुनो, चित्त की शांति की कहानी,

ध्यान की कविता लिखती रूहानी।


मन को वश में करना यही है मूल,

ध्यान रंग भर जीवन करे अनुकूल।


चिंता भगाता है, सुख की देने धूप,

ध्यान भर मन को, नवउमंग से अनूप।


ध्यान से जुड़ता है आत्मा से संवाद,

खो जाता है मन उलझन अवसाद।


ध्यान जगाता है, सच्चे स्वरूप को,

अनंत शक्ति बढ़ाता है तन-मन को।


ध्यान रंगीन बनाता सफलता की चाह,

जीवन बढ़ता नई ऊँचाइयों की राह।

    


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