STORYMIRROR

Arun Gode

Tragedy

4  

Arun Gode

Tragedy

याद तुम्हारी

याद तुम्हारी

1 min
1

 याद तुम्हारी

यूं ही कितने साल गुजर गए

फिर भी तेरी याद दस्तक देती है।

जब भी मेरा मन उदास होता

पुरानी यादों में, मैं तुझ में खो जाता।

 

हर सुख-दुख के हर पल में

तू हमेशा रही मेरे दिल के पास। 

काश जीवन का सफर यूं ही चलता,

तो मेरा भी सफर आसान हो जाता।

 

तेरी यादें आती अक्सर

जब मन हो जाता अस्थिर।

मेरा दिल तेरी यादों में

क्यों रहता है सदा विचलित?

 

तेरी यादें बनाती उसे अस्थिर

जब अपने ही मुझे कर दें दरकिनार। 

विचलित दिल मांगता है सहारा

फिर बेचारा तुझे ही पुकारता दोबारा।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy