वतन से प्यार
वतन से प्यार
वतन से मैं बेशुमार प्यार करती हूं।
कैसे मिली आजादी अनगिनत कहानियां सुनाई थी हमारे दादा दादी नाना नानी ने।
आप बीती उनकी थी क्या देखा उन्होंने जवानी में।
सुना था मैंने कितनी मुश्किलें उठाई थी तब स्वतंत्रता सेनानियों ने।
आजाद देश में सांस लेने वाले युवा वर्ग को कैसे समझाऊं?
आजादी कितनी महंगी है इसकी कीमत उन्हें कैसे बतलाऊं?
उन सेनानियों के किस्से ही कविता और कहानियों के रूप में प्रदर्शित करती हूं मैं,
आओ बच्चों आज तुम्हारी नानी दादी बनकर उन कथाओं को तुम्हारे सामने मैं फिर से दोहराऊं ।
