Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

Jeevan singh Parihar

Tragedy

5.0  

Jeevan singh Parihar

Tragedy

वृद्धाश्रम

वृद्धाश्रम

1 min
566


इस ज़माने में तेरी पहली, चीख सुनकर 

दिल ने एक सुकून सा पाया था।


तेरे जन्म पर मैं, फूले न समाया था,

गली मोहल्ले में, लड्डू बंटवाए थे।


तुझे देखकर ही मैंने, अपने बुढ़ापे का सुकून,

उस भरी जवानी में पाया था।


तेरी हर खुशी तुझे देने को लेकर,

अपनी हर खुशी को दाँव पर लगाया था।


तेरी उंगली पकड़कर, अपने दम पर

तुझे एक पहचान दिलाई थी।


पता न था की वक्त की पट्टी,

इतनी उल्टी पड़ जाएगी,


हद से ज्यादा चाहने वाली हस्ती मुझे,

अपने से इतना दूर (वृद्धाश्रम) छोड़ जाएगी ।


मुझे, अपने से इतना दूर छोड़ जाएगी ।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy