वृद्धाआश्रम
वृद्धाआश्रम
आजकल वृद्धाश्रम हो गये हजार
संयुक्त परिवार रह गये अब दो चार
कितना आज नैतिक पतन हो गया,
हमारा लहू ही आज पराया हो गया,
लहू से बह रही, परायेपन की बयार
आजकल वृद्धाआश्रम हो गये हजार
अब कहां है, वो दादी की कहानियां
अब कहाँ है, वो दादा की जुबानियाँ
वृद्धाआश्रम ने लील लिया सब प्यार
आज की पीढ़ियों ने कर दिया लाचार
दादा-दादी की न रही घर में बहार
आजकल वृद्धाश्रम हो गये हज़ार
सुधार नहीं किया तुम्हे भी मिलेगा,
आसपास के सब लोगों को मिलेगा,
माता-पिता का मिलेगा ये उपहार
आप होंगे वृद्धाआश्रम के चमत्कार
जैसी करनी वैसी ही भरनी होगी,
आपके कर्मों की गिनती होगी,
बुरे कर्मो पे मिलेगा शूलों का उपहार
बेटों से मिलेगा वृद्धाआश्रम का प्यार
अपनी बेटी को दो सदा अच्छे संस्कार
खत्म होंगे फिर तो वृद्धाआश्रम हज़ार
सास-ससुर को माने माता-पिता समान
फिर आपका सदा सुखी होगा घर-संसार
