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सोनी गुप्ता

Abstract Inspirational

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सोनी गुप्ता

Abstract Inspirational

वो सफर

वो सफर

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2021 का वो सफर आज भी याद आता है, 

जहाँ थी सपने पूरे होने की एक अभिलाषा, 

वो पल वो सफर आज फिर से याद आता है, 

बीता हुआ हर लम्हा कानों में कुछ कहता है, 


इस सफर में कितने ही लोगों से मुलाकात हुई, 

उन मुलाकातों में हमारी बीती कितनी बात हुई, 

जहाँ अपने सपनों का नगर हमने सजाया था, 

उस सपनों संग कितनी यादों को सजाया था, 

बीता हुआ हर लम्हा कानों में कुछ कहता है, 

2021 का वो सफर आज भी याद आता है, 


मेहनत लगन और ईमानदारी से काम किया , 

लगी रही दिन रात न कभी मैंने आराम किया, 

अपनों की भीड़ में खुद को मैंने अकेला पाया, 

लड़ते हुए हालातों में न था अपनों का साया, 

बीता हुआ हर लम्हा कानों में कुछ कहता है, 

2021 का वो सफर आज भी याद आता है, 


नहीं मालूम सफर का कितनी दूर किनारा है, 

इस सफर दिल हमारा कितनी ही बार हारा है, 

जो पाया वह किस्मत की आंधी में बिखर गए, 

कुछ शेष बचे तो कुछ अश्रु बनकर यूँ बह गए, 

बीता हुआ हर लम्हा कानों में कुछ कहता है, 

2021 का वो सफर आज भी याद आता है, 


जिंदगी की कड़ी धूप का हमारा ये सफर था, 

दिल में एक लगन और मन में एक जज्बा था, 

सफर के लिए चल पड़ा सोचा थोड़ी ही दूरी है, 

पर पथ में कहीं रुक जाना तो थोड़ी मजबूरी है, 

बीता हुआ हर लम्हा कानों में कुछ कहता है, 

2021 का वो सफर आज भी याद आता है, 


दिन भर चलते-चलते पथ में कब संध्या आ गई, 

और इस बात का हमें कभी ना आभास हुआ, 

नीरवता के प्रश्न मन में जाने कितनी आती थी, 

सफर के बारे में सोच सोच रात गुजर जाती थी, 

बीता हुआ हर लम्हा कानों में कुछ कहता है, 

2021 का वो सफर आज भी याद आता है, 


आज आशा यही जो सफर शुरू हुआ वो पूरा हो, 

हर ख्वाब जो सोचा था वह ना अब अधूरा हो, 

दीपक बुझने से पहले हाथ और उजाला हो,

बंद द्वार सभी खुल जाए किस्मत पर बदल जाए, 

बीता हुआ हर लम्हा कानों में कुछ कहता है, 

2021 का वो सफर आज भी याद आता है 



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