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Rahim Khan

Tragedy Action Inspirational

4  

Rahim Khan

Tragedy Action Inspirational

वो पन्ना थी......

वो पन्ना थी......

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वो पन्ना थी वो पन्ना थी

बलिदान की वह अमर गाथा ;

स्वाभिमान की वह अमर माता ;

ममता को बलिवेदी पर सजाने वाली 

वो पन्ना थी 

वो पन्ना थी 


तलवार की ललक अस्त हो गई 

कपट की आग पस्त हो गई 

स्वामिभक्ति को षडयंत्र से बचाने वाली 

वो पन्ना थी

वो पन्ना थी 


बनवीर था अपनी कुटीलता पे आड़ा हुआ 

खंज़र ले के महल की दर पे खड़ा हुआ 

उदय को उठा कर चंदन को सुलाने वाली

वो पन्ना थी 

वो पन्ना थी 


धरा का कण कण रक्त से भीग रहा था 

मां का ह्रदय अंदर ही अंदर चीख रहा था

व्यथा की इस बेला में भी आह न करने वाली 

वो पन्ना थी 

वो पन्ना थी 


नर से बढ़कर नारी का मेवाड़ ने कमाल देखा 

खंडहरों में शिशकता अपना भावी काल देखा 

तिफ्ल को पाल कर तख्त पर बिठाने वाली 

वो पन्ना थी 

वो पन्ना थी।


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