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Ritik Dhiman

Abstract Tragedy Others

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Ritik Dhiman

Abstract Tragedy Others

तेरी दुनिया

तेरी दुनिया

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दुनिया तेरी क्यूं हो गई खराब

दुनिया तेरी बन गई तेजाब

दुनिया तेरी ज़ालिम लगे

दुनिया तेरी का कोई होर बना बैठा नवाब


तेरी दुनिया का रंग देख रहा हूँ मैं

ईमान बेचकर खुदा को समेट रहा हूँ मैं

घमंड हुआ तुझे तेरी कला पर

तो इंसानों का काला चिट्ठा खोल रहा मैं


यहाँ माँ बाप भाई बहन ना कोई रिश्ते हैं

जो तूने सुनाए बो सब नाम के किस्से है

रिश्ते नातों को देखने गया मैं जब

तो ये सब मुझे लगे झूठ के हिस्से है


यहाँ मोहब्बत बस जिस्मों तक लगती है

धोखे के शहर में मैंने बनाई एक बस्ती है

तेरे बारे में जब मैंने बात की वहां

लोगों ने कहा खुदा तो बस नाम की हस्ती है


क्या दुनिया का तेरी हाल हो रहा है

कलियुग में नया प्यार हो रहा है

हर किसी की सोच यहाँ biklan हुई

यह सब देख कर मेरा भी दिमाग खराब हो रहा है


तूने सोचा होगा मैंने खूबसूरती का muaina kiya h

इंसान को बना के मैंने कला को iena दिया है

पर इंसान तेरी दुनिया की बदसूरती की वजह बना

kyu नहीं तूने इन सब को ek अच्छा दिल दिया है


dhoke हो रहे यहाँ रिश्ते नातों में 

पैसे पे बिक रहे यहाँ हर कोई रातों में 

कलयुग भी तेरा हो रहा बड़ा

खून के प्यासे हो रहे यहाँ धर्म और जातों में


दुनिया का हाल देख के 

तू भी रोने लगा 

मिट गये जज़्बात मेरे

जब 6 साल की बच्चियों का रेप होने लगा

अक्सर सोचता हूँ क्यों तूने ये दुनिया बनाई

यहाँ इंसान toh insaniyat का दायरा खोने लगा


मैंने राजा को देखा है चोरी का ताज रखते

मैंने रानी को देखा है किसी को बरबाद करते

कहते इश्क़ नफा है यहाँ 

जिसे तू चाहे उसे तो खुद ख़ुदा बरबाद कर दे


प्यार मिट गया तेरी दुनिया में अब

सब जिस्म के बन गए शिकार है

क्या तू likh rha मेरी बाते

यहाँ तो मिट रहे अब मेरे jasbat है


दुनिया तेरी क्यूं हो गई खराब

दुनिया तेरी बन गई तेजाब

दुनिया तेरी ज़ालिम लगे

दुनिया तेरी का कोई होर बना बैठा नवाब



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