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Surendra kumar singh

Fantasy

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Surendra kumar singh

Fantasy

वो एक दिन

वो एक दिन

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वो एक दिन

जब भी याद आता है

मन खुशी और

आनन्द से भर जाता है


दुनियां भर की दुश्वरियाँ

कठिनाइयों की जकड़न

अभाव की बौखलाहट

हवा में घुलकर

दूर जाने लगती हैंं


हवा की तरह

मुझसे दूर।

एक दिन तुम्हारे साथ

होने भर से

और अक्सर वो

मुलाकात याद आती रहती है


खास कर जब मैं 

तन्हा होता हूँ

तुम्हारी याद में

खोया रहता हूं।


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