STORYMIRROR

SHREYA PANDEY .

Romance Inspirational

4  

SHREYA PANDEY .

Romance Inspirational

वो अजनबी ना था

वो अजनबी ना था

1 min
309

एक थी राहें हमारी

कदम भी उठाए थे साथ में

वो अजनबी जो एक दूजे में ऐसे बंधे

की बिछड़ ना पाए फिर कभी


लफ़्ज़ों की दोस्ती ऐसी हुई

की लब भी कभी थके नहीं

हर एक शब्द घायल कर गए

दिल के सरगम ताल भी


दिन जो बातों में बीत रहे थे

रातें को काटे कटती नहीं थी

दिल के तार वो ऐसे जोड़ गए

की बहारों में मुलाकातें कहीं थी

तो कहीं जाम - ए - महफ़िल सजी थी


वो जो कभी ज़िन्दगी बन गए थे

कभी नज्म तो कभी बंदगी बन गए थे

आज वो शामिल हैं मुझमें, मेरी दुविधा में

की आज जो अजनबी है कैसे मेरे ग़ज़लों कि सादगी बन गए थे


शिकायत तो थी उन्हें हमसे 

गिले शिकवे रंजिश थी उनकी

मुकद्दर में नहीं थे वो हमारे

ज़िन्दगी में आना साजिश थी उनकी

वो अजनबी जो अजनबी ना था, ऐसा ढाल गया खुद में

की बिछड़ ना पाए हम फिर कभी।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance