STORYMIRROR

Anil Pandit

Drama Fantasy Inspirational

4  

Anil Pandit

Drama Fantasy Inspirational

वक्त का आईना

वक्त का आईना

1 min
13

शहर में उदासी की बात हो रही है

ये कौन रो रहा है या फिर बादल बरस रहा है


किसकी सिसकियाँ सुनाई दे रही है

शायद फिर कोई सपना टूटा है


दर्द की परछाई बोल गई है

निगाहों की बेबसी  बह रही है


वक्त के आईने में

तुम भी वही हो और गम भी वही है


फिक्र तो हो रही है

जिंदगी जिस तरह गुजर रही है



क्यों शब्दों में कहा नहीं जाता

हाल जो है और एक गुमनाम तकदीर का


यकीन होता है उसपर भी

मीठी बात बोलता है जो

चेहरे पर एक और चेहरा ले कर


वक्त का आईना

इंसान की पहचान  दिखा ही देता है


फिर से उम्मीद की नाव पर सवार होकर

जिंदगी को जीना है  जी भरकर



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama