STORYMIRROR

Anil Pandit

Comedy Romance Fantasy

3  

Anil Pandit

Comedy Romance Fantasy

अव्यक्त प्रेम भावना

अव्यक्त प्रेम भावना

1 min
17

देखा प्रेम में ये पीड़ा कैसी

कह नहीं पा रहा है प्रेमी

उग आए कॅक्टस के कांटे की तरह

मन में उसके चुभती रहती


सोचा स्वप्न में

प्रेम भावना व्यक्त कर दु

मै तुमसे…

मैं तुमसे...

मैं तुमसे...

तभी प्यार के खटमल उसी की नींद  उड़ाई


देखा  जो दर्पण में

फिर  से वहीं करने लगा प्रयास


कैसे कहूँ  प्रेम भावना

हो जाता हूँ उदास


प्यार के लड्डू के कण कण में

मेरे प्रेम की हैं मिठास

इस बात का तुम्हें नहीं एहसास


क्या किया जाय क्या कहा जाय

प्रेमी  हैं दुविधा में

अव्यक्त  प्रेम भावना

गुम हो गईं ठंड के कोहरे में


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Comedy