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Vimla Jain

Comedy Tragedy

4.7  

Vimla Jain

Comedy Tragedy

मेरे दिल का हाल सुनोहास्य रस

मेरे दिल का हाल सुनोहास्य रस

3 mins
133


हास्य 9 रसों में से एक रस है जिसका अर्थ सुखांतक अथवा कामदी होता है। रस का अर्थ एक भाव/आस्वाद से होता है और रस-सिद्धान्त में प्राचीन भारतीय कला जिसमें रंगमंच, संगीत, नृत्य, काव्य और शिल्पकला भी शामिल है।

अगर हम किसी के भी मुंह पर हास्य का भाव ला सकें उसके मन को थोड़ा आनंदित कर सके तो उससे बड़ी बात और क्या होगी

इस पर मेरी हास्य रचना

यह मेरे दिल की ही साजिश थी

कि मेरे भी जीवन में आए एक सुंदर परी ।

फिर क्या हुआ सुनो मेरी दास्तान दुख भरी

एक बार की बात सुनाऊं यारों।

मैं था एक प्यारा सा नौजवान।

सपने देखा करता था दिन में भी हजार।

सोचता था एक प्यारी परी मेरी भी जीवनसंगिनी बनेगी।

जिसके होंगे लंबे लंबे बाल।

हुआ ऐसा 4,5 मकान छोड़ के सामने वाले घर में मैंने देखा किसी को लंबे बाल आगे लेकर पोंछते हुए।

मन बल्लीयो सा उछलने लगा।

मन करा छतों से कूदकर पहुंच जाऊं सामने ।

देख आऊँ कौन है वह लंबे बालों वाली परी।

अब जब भी टाइम मिले तक आंखें मेरी छत पर ही खड़ी रहती।

कि कब मुझे उसकी शकल दिखेगी।

मगर हमेशा बाल ही नजर आते।

एक दिन हिम्मत कर कदम उस घर की तरफ उठ गए

जाकर मैंने दरवाजा खटखटाया

मन बहुत घबराया।

तो भी हिम्मत से खटखटाया।

मन जो उस परी को देखने इतना बेचैन था ।

कि सामने हिम्मत को टूटने देना नामुमकिन था।

दो-तीन बार खटखटाने के बाद जब दरवाजा खुला।

एक सरदार जी बाहर निकल कर आया

बोला

क्यों दरवाजा खटखटा रहे हो ।

क्या काम है जो आ रहे हो।

मैंने हिम्मत करके बोला आपके घर में जो लंबे बालों वाली आपकी बहन है,

आप उसे बुला दीजिए ,सरदारजी जोर से हंसकर बोले

भाई मैं तो यहां अकेला रहता हूं ।

यहां तो कोई नहीं है।

मैंने बोला तो लंबे बाल वाली कौन है।

जो ऊपर बाल सुखाती है ।

हर तीसरे दिन छत पर आती है।

आज मन उससे मिलने का कर रहा है।

सरदार जी बोले ठहर मैं तुझे बताता हूं

कि वह कौन है ।

ऐसा कहकर उन्होंने अपनी पगड़ी हटाई।

और अपने बाल खोलकर अपनी जटा लहराई।

मेरे तो सारे सपने चकनाचूर हो गए।

क्योंकि वह बाल वाली नहीं बाल वाला निकला

मन बहुत उदास हो गया।

संभलने में साल लग गया।

उसके बाद मन को मनाया।

कभी ना हमने उसको भटकाया ।

पढ़ने में है मन को लगाया ।

और अपनी मंजिल को पाया ।

तो यह है मेरी राम कहानी।

सुन लो और समझ लो यारों ।

कभी कभी आंखों देखी भी सच नहीं होती है यारों ।

जब सच से पाला पड़ता तो घड़ों पानी पड़ता सिर पर

फिर आती अक्ल ठिकाने।



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