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Usha Gupta

Tragedy

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Usha Gupta

Tragedy

वहाँ खड़ी वह औरत

वहाँ खड़ी वह औरत

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अपनी लाश उठाये

आँसुओं को पीछे ढकेल

श्रृंगार कर

ग्राहक की प्रतीक्षा में

आस लगाये

वहाँ खड़ी वह औरत


शायद कोई आये

लगाये बोली इस

मृत शरीर की

भूख से चिपकी आँतों को

पल्लू के भीतर छिपाये

वहाँ खड़ी वह औरत


नोच इस शरीर को

दे दे शायद कुछ सिक्के

रोटी के दो कौर

मिल जायें

खींचने के लिये

लाश को आगे

वहाँ खड़ी वह औरत


या फिर थी प्रतीक्षा

शायद, शायद

मिल जाये कोई मसीहा

फूँक दे जान इस लाश में

और फिर से जी उठे

वहाँ खड़ी वह औरत।



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