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Manju Rani

Romance Tragedy Others

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Manju Rani

Romance Tragedy Others

उस की कमीज़

उस की कमीज़

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समय ने ऐसी करवट ली

कि उसकी कमीज़  से

"अहम् त्वम् अस्मि" की

खुशबू अब आती नहीं ।

उस कमीज़ को छूने से

सुकून   मिलता  नहीं ।

चाह कर भी उसकी याद

मुस्कुराहट बिखेरती नहीं ।

उसके स्पर्श से प्यार का

एहसास  होता   नहीं ।

उसकी प्यारी-प्यारी बातें

दिल  तक पहुँचती नहीं ।

फिर भी उसकी आँख का

आँसू मेरी आँख से गिरता ।

क्यों उसकी आवाज सुनते

ही  हृदय  पिघल उठता ।

उसकी बातों पर यकीन

करने  को  दिल  करता ।

पर  फिर  कमीज़  पर

पड़ी  सलवटे   मिलती ।

तो   इस  दिल   को

तार-तार   कर   जाती ।

मैं   धरा-सी   उसके

इर्द-गिर्द       घूमती ।

पर उसने अपने इर्द-गिर्द

एक नई दुनिया बसा ली ।

अब उसकी कमीज़ से

उसकी  खुशबू   आती ।

जो   मेरा  रिश्ता  उस

कमीज़  से  तोड़  गई ।

और  मेरी  इस्त्री  कहीं

दुबक  कर  बैठ  गई ।

फिर  भी अपने रिश्ते की

कमीज़ अच्छे से तह कर दी ।

जब  भी  वो उसे  पहने

तो   सलवटे   न   मिले ।

खुशबू    न   सही  पर

अपनापन  तो     मिले ।


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