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Rajendra Jat

Drama Fantasy

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Rajendra Jat

Drama Fantasy

उम्र

उम्र

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चंद लम्हे क्या मिले, हमने उन्हें "उम्र" का नाम दे दिया।

कभी खुशी तो कभी गम का बस इनाम दे दिया।


आज और कल का बस फेर है,

चंद लम्हों का ये सफर फिर तो सब अंधेर है।

फिर क्यों ख्वाहिशों का कोई पैमाना नहीं ?

ख्वाबों का भी इसके अब तो ठिकाना नहीं।

इंतहा तो जब हुई, खुदा के बंदे ने खुद को खुदा कह दिया।

चंद लम्हे क्या मिले, हमने उन्हें "उम्र" का नाम दे दिया।


जीवन के संघर्षों ने कभी हार तो कभी जीत का इनाम दे दिया।

चंद लम्हे क्या मिले, हमने उन्हें "उम्र" का नाम दे दिया।



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