मन में रहने दो
मन में रहने दो
1 min
182
शब्दों को होंठों पर रख “मन” के भेद न खोलो,
जो मन में है मन में रहने दो ...
मजबूत अपने चरित्र को जग में ऐसे न तोलो,
जो मन में है मन में रहने दो ...
हार और जीत के फेर में सपनों से अपने मत खेलो,
जो मन में है मन में रहने दो ...
क्रोध को अपने यूँ न अश्रुओं में बहाओ
जो मन में है मन में रहने दो ....
कोई नहीं यहाँ समझने वाला "तेरे" मन की भाषा,
मोह-माया ही इस स्वार्थी जीवन की परिभाषा,
इसलिए
जो मन में है मन में रहने दो .....
