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aazam nayyar

Abstract Fantasy Children

4  

aazam nayyar

Abstract Fantasy Children

उल्फ़त

उल्फ़त

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रख मगर तू ज़रा दिल में नफ़रत नहीं 

कर रुसवा तू मगर दिल से उल्फ़त नहीं


कर ली है खूब रब से दुआ भी मैंने

जिंदगी को मिली ग़म से राहत नहीं

 

वो गया छोड़कर गांव को शहर में  

लिक्खा उसनें कभी यार फ़िर ख़त नहीं


इसलिए दिल भरी है उदासी मेरी 

दिल की कोई हुई पूरी हसरत नहीं


सोच में दिल डूबा है अभी रात दिन 

काम की निकली कोई सूरत नहीं


क्यों करे है तल्ख़े गुफ़्तगू बेवज़ह 

मेरी ही उससे कोई अदावत नहीं


वादा उसनें किया था वफ़ा का आज़म 

बदली उसनें अपनी यार फ़ितरत नहीं



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