Vaishnavi Pathak
Drama
कुछ मिल साथ चलते चलते न जाने कब
हम एक दूसरे जैसे बन गए
हमारे अलावा भी बाहर एक
दुनिया है ये हम भुल गए।
तू साथ है तो ग़म का कोई पता नहीं होता
दुनिया के उन उसूलों से कभी डर नहीं लगता।
अजनबी बन गए..
माफ कर दे
बुढ़ापा आ गया...
तूने सीखा दिय...
मोहब्बत
बच्चा है वो..
ये नदी ही है....
ज़माना और जिं...
एक रात
तू साथ है तो....
माता-पिता ने हर मुमकिन जगह खुशी दी... संकट के समय फिर से सिंचा मुझे... माता-पिता ने हर मुमकिन जगह खुशी दी... संकट के समय फिर से सिंचा मुझे...
कई मरकर भी जी रहे कई जीते जी मर रहे हर रोज आज भी। कई मरकर भी जी रहे कई जीते जी मर रहे हर रोज आज भी।
मिलने चोरी चुपके से पनघट पर तुम बुलाती रही मैं आता रहा... मिलने चोरी चुपके से पनघट पर तुम बुलाती रही मैं आता रहा...
इस दिल से उस दिल तक का ये रिश्ता जन्म-जन्मांतर का है.. इस दिल से उस दिल तक का ये रिश्ता जन्म-जन्मांतर का है..
परियों की दुनिया काहे देखें कुछ असली सपने बुन लें हम। परियों की दुनिया काहे देखें कुछ असली सपने बुन लें हम।
वो पीपल का वृक्ष जो धराशायी हो चुका है आज बहुत याद आ रहा है...! बहुत याद आ रहा है.. वो पीपल का वृक्ष जो धराशायी हो चुका है आज बहुत याद आ रहा है...! बहुत य...
सभी में झलकता है, कहीं न कहीं, कभी न कभी, अपनी माँ का अटूट-अटूट प्यार।। सभी में झलकता है, कहीं न कहीं, कभी न कभी, अपनी माँ का अटूट-अटूट प्यार।।
काम, क्रोध, लोभ अब जाने लगे सेवा का भाव अब ज़्यादा जगा है। काम, क्रोध, लोभ अब जाने लगे सेवा का भाव अब ज़्यादा जगा है।
प्रेम शून्य है, दुनियां गोल, इसीलिए वह है अनमोल।। प्रेम शून्य है, दुनियां गोल, इसीलिए वह है अनमोल।।
साथ जीने और मरने की कसम भी ले रही थीं उम्र भर की? साथ जीने और मरने की कसम भी ले रही थीं उम्र भर की?
ऑंखों में ऑंखें डाल कर देखने की कोशिश की तो सभी की आँखें नीचे की ओर झुकती चली गईं। ऑंखों में ऑंखें डाल कर देखने की कोशिश की तो सभी की आँखें नीचे की ओर झुकती चली ग...
मुझे सपनों के अपने जहां से मिलने का सुवसर मिल गया अनूठे उस एक पल- मात्र में... मुझे सपनों के अपने जहां से मिलने का सुवसर मिल गया अनूठे उस एक पल- मात्र में...
सुने समाज, तो एक बात कहूँ, कीजिये दिन में शादी कम लोग बुलावें प्रेम से, रोकिये पैसे क सुने समाज, तो एक बात कहूँ, कीजिये दिन में शादी कम लोग बुलावें प्रेम से, रोकि...
भूल नहीं पाते पर, उसको भुलाए जी। भूल नहीं पाते पर, उसको भुलाए जी।
जिस प्रकार हम ट्रेन, बस में यात्रा करने से पहले तैयारी करते है वैसे ही जीवन यात्रा जिस प्रकार हम ट्रेन, बस में यात्रा करने से पहले तैयारी करते है वैसे ही जीवन ...
पर तुम कहीं नजर नहीं आ रही थी... चारों ओर डर और सन्नाटा था। पर तुम कहीं नजर नहीं आ रही थी... चारों ओर डर और सन्नाटा था।
हम सब इतना तो मिलकर कर ही सकते हैं...! हम सब इतना तो मिलकर कर ही सकते हैं...!
सच ज्ञात है पर जागरण का पथ अज्ञात है थोड़ी सी धूप कहीं थोड़ी सी छाँव है... सच ज्ञात है पर जागरण का पथ अज्ञात है थोड़ी सी धूप कहीं थोड़ी सी छाँव है...
क्या ये मेरा अन्त है ? क्या ये मेरा अन्त है,क्या ये मेरा अन्त है ?_ क्या ये मेरा अन्त है ? क्या ये मेरा अन्त है,क्या ये मेरा अन्त है ?_
के रहस्य के उजागर में लगे हुये है पर कोई सुलझा ना पाया।। के रहस्य के उजागर में लगे हुये है पर कोई सुलझा ना पाया।।