STORYMIRROR

Vaishnavi Pathak

Drama

3  

Vaishnavi Pathak

Drama

ज़माना और जिंदगी

ज़माना और जिंदगी

1 min
236

ज़माने की ज़माने ने ज़माने से मांग की

ज़माने ने ज़माने की उस मांग को ठुकरा दिया


जमाना अब जोश में ज़माने से लड़ रहा है

पता नहीं क्यों जमना लढते हुए अपने होश खो रहा है


जिंदगी की जिंदगी से बोहोत कुछ है ख्वाहिशें

जिंदगी की जिंदगीसे जितनी थी फरमाइशें


जिंदगी जब जब भी देती जिंदगी का वासता

जमाना दिखा देता है उसे एक ग़लत रास्ता।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama