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Bhavna Thaker

Romance

4  

Bhavna Thaker

Romance

तू कोसों दूर है

तू कोसों दूर है

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कोसों दूर है 

मेरी प्रीत की 

अभिव्यक्ति का प्रतिसाद 

क्या पहुँचती होगी 

मेरी सदाएं 

मेरे महबूब के सीने में? 

धड़क रहे 

पत्थर की दहलीज़ तक?

क्यूँ अब मेरी करवटों की 

आहट से बेखबर है

जान लेता था जो कभी

मेरा हाल 

मेरी साँसों की लय से,

कैसे सूखे 

रिश्ते की दरार में पनपती 

दूरियों की सीलन 

क्यूँ मेरी आहों की आहट पर

तिल भर तू ना पिघले,

मौत को महबूब बना लूँ 

शायद रश्क मेरी ओर

तुम्हें खिंचता लाए,

देख लूँ जी भरकर

और छवि तेरी 

डूबती आँखों में ले चलूँ 

तो मौत की महफ़िल भी

खूब भाए!


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