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Bhavna Thaker

Classics

4  

Bhavna Thaker

Classics

तुम्हारी यादें

तुम्हारी यादें

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चंदन क्यारी सी महकती तुम्हारी यादें उपहार है मेरी ज़िंदगी का 

फासलों का दर्द जानती ही नहीं 

तुम सिर्फ़ मेरे हो वो यकीन जश्न है मेरी ज़िंदगी का..


थिरक उठते है पैर मुस्कुरा देते है लब रोम रोम नग्में गाता है 

तुम्हारे साथ बिताए हर लम्हें मेरे ख़्वाबों में आकर

मुझसे गुफ़्तगु करते हैं तब मेरे मन की अंजुमन में तुम्हारे नाम की बाँसुरी बजती है..


संगीत की तरह सुनती हूँ आहटें 

न अश्क नहीं बहाती, इंतज़ार लिए मेरी आँखें

राहों पर रेशमी धागे चाहत के बिछाती जम जाती है..


रात के सन्नाटे मेरे साथी है 

सिलवटों को सहलाते इनसे बातें करते करवट लेती हूँ तब,

बहती बयार से उठते हल्के रव में सदाएं सुनती हूँ जिस दिशा से तुम गए थे.. 


पुकारती हूँ समुन्दर से उठती हर लहरों में 

अपनी आवाज़ को मलते तुम्हारे नाम की मिश्री, 

पानी पर लिखकर प्रेम बहा देती हूँ ये सोचकर कि

एक लहर लहराती तुम तक सफ़र करते पहुँच जाएगी.. 


तुम ओख में भरते उस प्रेम सभर लहर को चूम लेना

कभी दरिया से मिलने जाओ तो, 

तुमसे इश्क नहीं इबादत की है तुम्हारी..


यादों की छुअन से झनझना उठते है एहसास मेरे, 

मृत हृदय की लाश नहीं मेरे सीने में मूरत है तुम्हारी,

क्यूँ बिरहन बनी बावली सी फिरूँ नखशिख तुमसे लिपटी हूँ..


साक्षात नहीं तुम तो क्या हुआ अमूर्त रुप से मेरे लहू संग बहते हो, 

वो वक्त ठहर गया है मेरी नैंन कटोरियों के भीतर

जब तुम गए थे मेरे भाल को आखरी बार चूमकर.. 


महक रही है फ़िज़ा उस मोहर की खुशबू से मिलकर 

कहो कहाँ जुदा है हम? मेरी यादों में हर लम्हा उपासना से उठ रहे हो तुम 

मेरी साँसों संग अविरत धड़क रहे हो तुम तुम्हारी यादें उपहार है...


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