तुम्हारी हँसी
तुम्हारी हँसी
छम छम करते बज रहे हो
एक साथ जैसे सैकड़ों घुँघरू
टप टप करते बरस रहे हों आसमान से सच्चे मोती
संतूर और जल तरंग की सुरीली आवाज तुम्हारी हंसी
लगता है जैसे परमात्मा हंस रहा हो तुम्हारी हंसी में
हंसती हो तुम, छा जाती है मुझमें सूफियों की मस्ती
और मन की बस्ती में जल उठते हैं हज़ारों दिए
इतनी पावन इतनी निश्चल, पवित्र और प्यारी तुम्हारी हंसी
भेद कर रोम रोम मेरे मन और मस्तिष्क पर
छाने लगता है अजीब सा सुरूर
तुम्हारी हँसी की अपनी हस्ती है
तुम्हारी मुस्कान में ही मेरी दुनियां बसती है।

