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Amit Singhal "Aseemit"

Romance Tragedy Fantasy

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Amit Singhal "Aseemit"

Romance Tragedy Fantasy

तुम बिन

तुम बिन

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क्या और कैसे कहूं कि तुम बिन कैसा हूं मैं।

जल बिना आवारा घूमते बादल जैसा हूं मैं।


हरियाली में भी मरुस्थल की रेत जैसा हूं मैं।

सावन की बूंदों में भी सूखे खेत जैसा हूं मैं।


चांदनी बिना अमावस्या के चांद जैसा हूं मैं।

ग्रहण लगे काले सूरज की आंच जैसा हूं मैं।


तुम बिन सावन को तरसते मोर जैसा हूं मैं।

बिन आवाज़ के चिड़ियों के शोर जैसा हूं मैं।


तुम हर बार दिलासा देती हो कि आती हूं मैं।

तुम कब समझोगी कि दीया बिन बाती हूं मैं।


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