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Monika Garg

Tragedy

4  

Monika Garg

Tragedy

तुम बिन

तुम बिन

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मेरे सनम, तुम बिन,

बुझा-बुझा सा मन।


न आरज़ू जीने की,

तमन्नाओं ने 

ओढ़ा कफ़न।


कट रही यह जिंदगी,

बस, गुजर रहा लम्हा।


तुम बिन कुछ भी नहीं,

तुम बिन सब धुआं-धुआं।


कैसे सहूँ साँसों की घुटन,

बिन पानी मछली यह मन।


ख़ामोश आँखें, चुप जुबान,

तड़पता तन, बिन प्राण।


गुजरती हवा तू ही बता,

कैसे हो उन से मिलन।


कुछ तो बता,

ऐ चंदा की चांदनी,

कहाँ खोए मेरे सनम।


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