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Monika Garg

Tragedy

3  

Monika Garg

Tragedy

मैं जननी

मैं जननी

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जननी हूं मैं इस जहां की ,

फिर भी मेरी पहचान नहीं!


मेरी ही संतान के पीछे ,

मेरा ही नाम नहीं!!


माना के दुर्गा चंडी काली हूं ,

मैं खुद अपनी पहचान बनाऊंगी।


पर इस मर्द प्रधान समाज से ,

मैं कब तक लड़ पाऊंगी।


सबर धैर्य ममता की

भी तो एक मूर्ति हूं,


सिर्फ चंडी बनकर लड़ते रहना

ही तो मेरा काम नहीं।।


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