Monika Garg
Abstract
क्यों करते हो
मेरी मेरी,
जब सब को
एक दिन
हो जाना ढेरी,
मत भूलो
इस दुनिया के
रंगमंच में,
हम
कुछ दिन के लिए
आए हैं,
वह ख़ुदा है
मालिक जहां का,
हम तो बस
किरदार निभाने
आए हैं ।
मैं जननी
तुम नहीं तो क...
तूं खुदा
जो कभी जलाया ...
किरदार निभाने...
ए जिंदगी तुझ ...
कैसे भुला दूँ...
तुम
इंतजार
ऐ चाँद
इच्छा रूपी नगरी का मन राजा है जो बहुत संवेदनशील है। इच्छा रूपी नगरी का मन राजा है जो बहुत संवेदनशील है।
बीमारी से लड़ता जीवन संग्राम बेरोजगार नौजवान।। बीमारी से लड़ता जीवन संग्राम बेरोजगार नौजवान।।
मिट्टी, पानी और चाक से बनाया जाता हूं मेरा इतिहास तो देखो मिट्टी, पानी और चाक से बनाया जाता हूं मेरा इतिहास तो देखो
क्यों की छोड़ सकता नहीं तरीका अपना फैलाने का ठेलम ठेला क्यों की छोड़ सकता नहीं तरीका अपना फैलाने का ठेलम ठेला
एक अटल चट्टान की भांति टिका हुआ हूं, फिर भी लोग कहते है कि, समय बहुत बदला सा नजर आ एक अटल चट्टान की भांति टिका हुआ हूं, फिर भी लोग कहते है कि, समय बहुत बदल...
पर कहाँ मोरी निंदीया मेरे नैना रातें जागी। पर कहाँ मोरी निंदीया मेरे नैना रातें जागी।
मित्रता की क्या पहचान इस बात से हूँ अभी तक अंजान। मित्रता की क्या पहचान इस बात से हूँ अभी तक अंजान।
पत्र युग के बाद आया मोबाइल का ज़माना लंबी बात होना बंद हो गया था पत्र युग के बाद आया मोबाइल का ज़माना लंबी बात होना बंद हो गया था
जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही ज़िन्दगी के गणित को समझ पाना जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही ज़िन्दगी के गणित को समझ पाना
काबिलीयत के रहते कमजोरों को पैसे व बल से दबा दिया जाता है काबिलीयत के रहते कमजोरों को पैसे व बल से दबा दिया जाता है
फिर अचानक एक पल में ख्वाबों का टूट जाना, आसान नहीं यूँ आगे बढ़ जाना फिर अचानक एक पल में ख्वाबों का टूट जाना, आसान नहीं यूँ आगे बढ़ जाना
चीजो को कुछ समझने लगी हूं ,बिन सोचे बोलने से डरने लगी हूं । चीजो को कुछ समझने लगी हूं ,बिन सोचे बोलने से डरने लगी हूं ।
गिरे गर टूटकर शाख से पत्ते, तो मिट्टी में मिल ही जाते हैं. गिरे गर टूटकर शाख से पत्ते, तो मिट्टी में मिल ही जाते हैं.
केवल और केवल भरत का भारत, हिंदुस्तान था।। “जय हों” हम फिर मिलेंगे, मिलते रहेंगे। केवल और केवल भरत का भारत, हिंदुस्तान था।। “जय हों” हम फिर मिलेंगे, मिलते रहे...
हम जो सोच नहीं सकते थे उसने एक प्रयास किया , महाकाल को हर लेने का खुद पे था विश्वास कि हम जो सोच नहीं सकते थे उसने एक प्रयास किया , महाकाल को हर लेने का खुद पे था व...
हम सबने मिलकर ठाना है अब अपने भारत को स्वच्छ बनाना है। हम सबने मिलकर ठाना है अब अपने भारत को स्वच्छ बनाना है।
आसान नहीं, लांघना चौखट संस्कारों की, तो पहले संस्कारों की, शुरू पाठशाला हो जाए, आसान नहीं, लांघना चौखट संस्कारों की, तो पहले संस्कारों की, शुरू पाठशा...
आज कहां कोई शिष्य गुरु के चरणों में शीश नवाता है आज कहां कोई शिष्य गुरु के चरणों में शीश नवाता है
स्टेशन जहाँ रेल की सवारी है , जहाँ से गुजरते सैकड़ो मुसाफ़िर हैं। स्टेशन जहाँ रेल की सवारी है , जहाँ से गुजरते सैकड़ो मुसाफ़िर हैं।
जो पूछ बैठे मेरे प्रेम का साथी कहां गई मेरी हृदय वासी रे! जो पूछ बैठे मेरे प्रेम का साथी कहां गई मेरी हृदय वासी रे!