टूटे हुए हैं
टूटे हुए हैं
तेरी महफिल में बहुत रूसवा हुए हैं
कुछ नहीं थे, चलो कुछ तो हुए हैं
अपमान का मैं पी गया दरिया
तुमने बुलाया था, कुछ न बोले
तुम्हारी चुप्पी पर हम बहुत शर्मिंदा हुए हैं
तुम्हारे भरोसे आया था, लोगों ने ढाया सितम
तुमने एक बार भी न कहा, मेरा प्यार है, मैंने बुलाया है
तुम्हारी खामोशी पर हम चूर चूर हुए हैं
मैं जानता था, ये महफिल अपनी नहीं
बड़े लोग, छोटे दिलों के बीच अपना क्या काम
लोगों ने दुत्कारा, तुमने क्यों मुहं फेरा
ऐसे प्यार से हम परकटे परिंदे हुए हैं
ये कैसी महफिल है, जहां बस रुपयों पैसे की बात
बता देते मोहब्बत हार जाएगी, अमीरों की महफिल में
तुम्हारा प्यार और ये पैसे वाले कितने छोटे दिल के हुए हैं
तुम्हारी महफिल से जाना कि आदमी बहुत सस्ता है
खाली जेब के लिए अमीरों के दिल नहीं कोई रस्ता है
तुम कह देते, मैं नहीं आता
ऊँच नीच, अमीर गरीब में भेद ही भेद हैं
ये भरम आज टूटे हुए हैं।
