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Renu Sahu

Romance Tragedy

4  

Renu Sahu

Romance Tragedy

टूटा प्याला...सपनो वाला

टूटा प्याला...सपनो वाला

2 mins
340

वो रात कितनी काली थी

खामोशी का काला साया था,

मैं दूर हो रही थी तुझसे

मेरी खुशियों का टूटा प्याला था।


तेरे हाथ से मेरा हाथ छूटा

किसी और ने जिसको थामा था,

मन मे नाम तेरा था लिखा

फिर गले मे क्यूं किसी और के नाम का माला था।


दोनों हाथ सजे थे मेरे

किसका प्यार उभर कर आया था,

समाज ने जिसका नाम लिखाया

या जिसका नाम दिल ने पुकारा था।


रोकर मेरे नैनों की गली से

आँसू भी बर्फ बन आए थे,

बह नहीं पाए थे लेकिन

अंदर ही अंदर भीगे थे।


माँ पिताजी की इज्जत

मेरे पावों को आगे बढ़ाती थी

तेरे प्यार की हर यादे

इनमे बेड़ियाँ लगाती थी।


पायल की भी छनक बंद थी

चूड़ियों में मातम छाया था,

मैं दूर हो रही थी तुझसे

मेरे सपनों का टूटा प्याला था।


सोलह श्रृंगार हुए थे मेरे

पर सुंदर ना लग पाई थी,

ढूंढ रही थी आंखे तुझे

मै खुद से हुई पराई थी।


वो बहनों की हंसी ठिठोली

मुझे गालियां लगने लगी,

सखियों की मुस्कुराहट

दिल को मेरे जलने लगी।


आशीष अब आशीष नहीं

शाप बन आँचल मे आए थे,

पर तेरे नाम की ओढ़नी,

क्यूँ मेरे हिस्से ना आए थे।


आँखों ने मेरे उसकी सूरत भी ना देखी थी

जिसके हाथो वरमाला पहन,

गरदन मेरी रो दी थी।


कल तक हम थे सबको मनाने वाले फिर क्यूं

आज बारात किसी और की आई थी,

दूर हो रही थी तुझसे

मेरे खुशियों की अर्थी सजाई थी।


जैसे जैसे पांव मेरे

मंडप को बढ़ने आए थे,

सांसे मेरी बोझिल सी

अपने भी लगते पराये थे।


हाँ मेरी देह थी वहाँ

आत्मा ना आ पाई थी,

सब आए थे बेटी विदा करने

मेरे प्यार की अर्थी की होनी विदाई थी।


अंतर्मन के चिथड़े थे उड़े

हृदय आलाप मे जागा था

मै दूर हो रही थी तुझसे

मेरी खुशियों का टूटा प्याला था।


कैसी झूठी शान के लिए

प्यार की मेरी बलि चढ़ी,

देह को दे मुस्कान का तोहफा

आत्मा ने खुदकुशी की।


तड़प गया मेरा जर्रा जर्रा

मेरा सब कुछ तो मुझसे छूटा था,

किस के शान की आहुति मे

मेरी मोहब्बत का उजड़ा बसेरा था।


अंतर्मन की तड़प देख

माँ ने मुझको बाहों मे जकड़ा,

ममता की छुअन मिली, टूटी नींद, 

और मैंने आंखे खोला।


हाय मुझे सुकून मिला

ये तो बुरा इक सपना था,

लेकिन खा गया मुझे अंदर तक

ये ज़ख़्म कितना गहरा था।


सपना था ये मेरा,

किसी और का सच होगा

जाने किस दर्द को,

मैंने उस रात जीया


हाँ, देखा हैे, कई जोड़ों को,

टूटते मैंने इस तरह

मजबुरी, जवब्दारी के तले 

उजड़ता टूटता बसेरा


एक प्यार होता जन्मो का 

बस हम्मे सबकुछ लुटाने का 

एक प्यार मिलता चाहत से 

जन्मो तक निभाने का 

जिसे मिल जाये दोनों साथ 

खुशकिस्मत कहलाता है 

और कुछ के नसीब बस एक ही मिलता 

वह उतने में खुश हो जाता है।

 


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